आज अशान्ति की सबसे बड़ी वजह है कि---- न केवल मनुष्य का अहंकार बढ़ता जा रहा है वरन ऐसे अहंकारियों की संख्या भी दिन - प्रतिदिन बढ्ती जा रही है l परिवार हो , कार्यालय हो या कोई संस्था हो , कुछ लोग ' विशेष ' लोगों की चापलूसी कर स्वयं को शक्तिशाली समझने लगते हैं और अपनी हुकूमत चलाना चाहते हैं l शक्ति का दुरूपयोग ही अशांति का कारण है l आज सबसे बड़ी जरुरत सद्बुद्धि की है l लोग अपनी शक्ति का दुरूपयोग कर के अपने लिए कमजोर की ' हाय ' इकट्ठी करते हैं , अपनी ही नींव को खोखला करते हैं l यदि सद्बुद्धि आ जाये तो अपनी शक्ति का उपयोग समाज के कल्याण के लिए , गिरे हुए और कमजोर को ऊपर उठाने के लिए करें तो लोगों से सच्चा सम्मान और दुआएं प्राप्त कर सकते है l
Thursday, 8 June 2017
Sunday, 4 June 2017
परिवार और समाज में अशान्ति का कारण ------ धन का लालच है
आज धन का लालच लोगों पर इस कदर हावी है कि रिश्तों का कोई महत्व नहीं रहा l आज से बहुत समय पहले तक वर पक्ष के लोग विवाह के समय जितना दहेज मिल गया , उससे संतुष्ट हो जाते थे और रिश्तों को निभाते थे l तृष्णा, लालच एक बीमारी है इसका सम्बन्ध किसी जाति या धर्म से नहीं , यह तो मन की कमजोरी है l लोभ , कामना , वासना से पीड़ित व्यक्ति एक बार के दहेज से संतुष्ट नहीं होता l वह बार - बार दहेज चाहता है l ऐसी स्थिति में कोई धन कमाने के लिए वैध - अवैध तरीके अपनाता है तो कोई दुबारा दहेज पाने के के लिए निर्दयी हो जाता है l यदि समाज में ऐसी जागरूकता आ जाये कि यदि किसी विवाहिता ने आत्महत्या की है या किसी की हत्या की गई है तो उस व्यक्ति का दुबारा विवाह होना असंभव हो जाये , उसे समाज स्वीकार न करे | पुरुष और नारी से मिलकर ही यह समाज बना है l यदि नारी जागरूक हो जाये , उसका आत्मिक बल जाग्रत हो जाये तो नारी पर होने वाले अत्याचार समाप्त हो जाएँ l
Friday, 5 May 2017
मन की शान्ति के लिए प्रार्थना जरुरी है
आज की आपा - धापी की जिन्दगी में प्रत्येक व्यक्ति परेशान है l जीवन में अनेक समस्याएं हैं इस कारण लोग तनाव में जी रहे हैं | व्यक्ति अपने लालच , स्वार्थ और अहंकार वश दूसरों को परेशान करता है , लेकिन सबसे बड़ी परेशानी मनुष्य का अपना स्वयं का मन है l अपने ही क्रोध , कामना , वासना से व्यक्ति परेशान रहता है और इसी की वजह से अनेक सांसारिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं l इन सब से मुक्ति के लिए जरुरी है कि हम कुछ समय सब बातों को भूलकर ईश्वर से प्रार्थना करें l
हम नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है क्या बुरा , इसलिए हमेशा सद्बुद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें l केवल एक सद्बुद्धि होने से जीवन की सारी समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं l
शरीर में कोई बीमारी है तो उसका इलाज अवश्य कराएँ , लेकिन प्रार्थना में इस सत्य को अवश्य स्वीकारें कि अपने ही इस जन्म या पिछले किसी जन्म के पापों के फलस्वरूप यह बीमारी है और फिर सच्चे मन से अपनी जाने - अनजाने भूलों के लिए पश्चाताप और भविष्य में सन्मार्ग पर चलने की शक्ति देने के लिए प्रार्थना करें l हमें यह याद रखना चाहिए कि निष्काम कर्म भी हम ईश्वर की कृपा से ही कर पाते हैं l जब हम अपने जीवन में निष्काम कर्म करते हैं और सच्चे दिल से प्रार्थना करते हैं , तो वे प्रार्थनाएं अवश्य सुनी जाती हैं l हमें सन्मार्ग पर चलते हुए धैर्य और विश्वास रखना चाहिए और उस आत्मिक आनन्द का इन्तजार करना चाहिए कि उस अज्ञात शक्ति की नजरों से हम दूर नहीं , उसने हमारी प्रार्थना सुन ली l
हम नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है क्या बुरा , इसलिए हमेशा सद्बुद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें l केवल एक सद्बुद्धि होने से जीवन की सारी समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं l
शरीर में कोई बीमारी है तो उसका इलाज अवश्य कराएँ , लेकिन प्रार्थना में इस सत्य को अवश्य स्वीकारें कि अपने ही इस जन्म या पिछले किसी जन्म के पापों के फलस्वरूप यह बीमारी है और फिर सच्चे मन से अपनी जाने - अनजाने भूलों के लिए पश्चाताप और भविष्य में सन्मार्ग पर चलने की शक्ति देने के लिए प्रार्थना करें l हमें यह याद रखना चाहिए कि निष्काम कर्म भी हम ईश्वर की कृपा से ही कर पाते हैं l जब हम अपने जीवन में निष्काम कर्म करते हैं और सच्चे दिल से प्रार्थना करते हैं , तो वे प्रार्थनाएं अवश्य सुनी जाती हैं l हमें सन्मार्ग पर चलते हुए धैर्य और विश्वास रखना चाहिए और उस आत्मिक आनन्द का इन्तजार करना चाहिए कि उस अज्ञात शक्ति की नजरों से हम दूर नहीं , उसने हमारी प्रार्थना सुन ली l
Monday, 1 May 2017
सुख - शांति से जीना है तो अपना मुखौटा उतारना होगा
सच्चाई और ईमानदारी में गजब का आकर्षण होता है , इसलिए समाज में अनेक लोग जो अनैतिक और अपराधिक गतिविधियों में संलग्न होते हैं अपने ऊपर शराफत का मुखौटा लगाकर रहते हैं l वे समाज में अपनी पहचान ऐसे रूप में दिखाना चाहते हैं कि उनके बराबर कोई सच्चा , ईमानदार और सह्रदय कोई है ही नहीं | ऐसे लोग स्वयं परेशान रहते हैं , उनका सारा जीवन इसी उधेड़बुन में चला जाता है कि इस झूठी पहचान को कैसे बनाये रखा जाये , इस कारण वे तनावग्रस्त रहते हैं l ऐसे लोगों की असलियत जानने वाले भी बहुत होते हैं जो अपना मुंह बंद रखने के लिए ऐसे लोगों से बहुत धन कमा लेते हैं l
शान्ति से जीने के लिए जरुरी है कि हम सद्गुणों को अपनाएं , सच्चाई की राह पर चलें ताकि हमें ऐसे किसी मुखौटे की जरुरत ही न पड़े l
शान्ति से जीने के लिए जरुरी है कि हम सद्गुणों को अपनाएं , सच्चाई की राह पर चलें ताकि हमें ऐसे किसी मुखौटे की जरुरत ही न पड़े l
Saturday, 29 April 2017
अनैतिक तरीके से धन कमाना ---- अशान्ति का सबसे बड़ा कारण है
जब व्यक्ति बेईमानी से और अवैध धन्धों से जो समाज के लिए घातक हैं ---- धन कमाता है तो इसका प्रभाव समाज पर कैंसर की तरह होता है क्योंकि यह काम कोई अकेला नहीं करता इसकी पूरी श्रंखला होती है जो धीरे - धीरे सम्पूर्ण समाज को अपने गिरफ्त में लेती है | जिस तरह कैंसर पूरे शरीर में फैलता जाता है उसी तरह यह भ्रष्टाचार , अनैतिक धन्धे पूरे समाज को खोखला कर देते हैं l इस समस्या से निपटने के लिए यदि दो - चार लोगों को सजा भी दे दी जाये तो यह समस्या हल नहीं होगी | क्योंकि इन अवैध धन्धे और बेईमानी के कार्य से भी हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है , ऐसे ही लोगों की दम पर उनका व उनके परिवार का पेट पलता है , इसलिए इस श्रंखला को तोड़ना बहुत कठिन है l
लेकिन समाज में शान्ति के लिए ईमानदारी , सच्चाई और नैतिकता जरुरी है l किसी भी समस्या से निपटने के लिए विवेक की जरुरत होती है l सर्वप्रथम नि:स्वार्थ सेवा और परोपकार कर आत्म - बल बढ़ाना जरुरी है l जब ऐसे आत्मशक्ति संपन्न और सच्चाई व ईमानदारी की राह पर चलने वाले लोग ज्यादा होंगे तो बेईमानी व अनैतिकता को पनपने का मौका ही नहीं मिलेगा , ऐसे लोग या तो नष्ट होंगे या स्वयं को बदलकर सच्चाई की राह पर चलेंगे |
लेकिन समाज में शान्ति के लिए ईमानदारी , सच्चाई और नैतिकता जरुरी है l किसी भी समस्या से निपटने के लिए विवेक की जरुरत होती है l सर्वप्रथम नि:स्वार्थ सेवा और परोपकार कर आत्म - बल बढ़ाना जरुरी है l जब ऐसे आत्मशक्ति संपन्न और सच्चाई व ईमानदारी की राह पर चलने वाले लोग ज्यादा होंगे तो बेईमानी व अनैतिकता को पनपने का मौका ही नहीं मिलेगा , ऐसे लोग या तो नष्ट होंगे या स्वयं को बदलकर सच्चाई की राह पर चलेंगे |
Tuesday, 25 April 2017
अशान्ति का कारण है ---- धन और पद से समर्थ लोगों का अहंकार
अहंकार से ग्रस्त लोग किसी एक देश या धरती से बंधे नहीं है वरन सारे संसार में इस दुर्गुण से ग्रस्त व्यक्ति हैं इसीलिए सारे संसार में लूटपाट , हत्या आदि अपराधिक घटनाएँ बढ़ रही हैं l यदि लोगों की रोटी , कपड़ा, मकान जैसी अनिवार्य जरुरत सम्मान के साथ पूरी हो जाएँ और रोजगार से उसकी ऊर्जा का सदुपयोग हो जाये तो एक सामान्य व्यक्ति अपराधिक गतिविधियों में संलग्न नहीं होता l लेकिन जब धन , पद और जातिगत अहंकार से ग्रस्त व्यक्ति गरीबों का शोषण करते हैं , उनका खून चूसकर अपनी सात पीढ़ियों के लिए संपत्ति जोड़ते हैं और पग - पग पर उन्हें तिरस्कृत करते हैं , तब धीरे - धीरे यही शोषित वर्ग संगठित होकर या किसी भी तरीके से समाज से बदला लेता है | शोषण और तिरस्कार की प्रतिक्रिया स्वरुप ऐसे अँगुलियों पर गिने जाने वाले बहुत कम लोग होते हैं जो संघर्ष कर महानता के स्तर पर पहुँच जाएँ l गरीबी और अपमान की आग में झुलसते व्यक्ति में बदले की भावना आ जाती है l यह स्थिति सम्पूर्ण समाज के लिए खतरा है l
इस धरती पर जीने का हक सबको है , मनुष्य , जीव जंतु , पेड़ पौधे निर्जीव , सजीव सबको धरती पर रहने का हक है | ' जियो और जीने दो ' से ही शान्ति होगी l
इस धरती पर जीने का हक सबको है , मनुष्य , जीव जंतु , पेड़ पौधे निर्जीव , सजीव सबको धरती पर रहने का हक है | ' जियो और जीने दो ' से ही शान्ति होगी l
Monday, 24 April 2017
लोग केवल अपने बारे में सोचते हैं
संसार में अशांति का एक बहुत बड़ा कारण है कि लोग केवल अपने बारे में सोचते, हैं | l अब लोगों पर स्वार्थ हावी हो गया है , जिससे उन्हें कोई फायदा हो उसी से वे मिलेंगे | मित्रता भी नि:स्वार्थ भाव से नहीं है , इसलिए आज का व्यक्ति भीड़ में भी अकेला है l इसलिए आज के समय में ईश्वर विश्वास बहुत जरुरी है l इसी विश्वास के सहारे हम कर्मयोगी बनकर अपने जीवन की कठिनाईयों का सफलता पूर्वक सामना कर सकते हैं l
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