Wednesday, 11 March 2020

भारतीय संस्कृति

     भारत  भूमि  पर  अनेक  महान  आत्माओं  ने  जन्म  लिया   l   स्वयं  ईश्वर  मनुष्य  रूप  में  यहाँ  अवतरित  हुए  l   हमारी  संस्कृति  ने  दुनिया  को  बहुत  कुछ  सिखाना  चाहा ,  लेकिन  इसे  पिछड़ा  हुआ  देश  समझकर  किसी  ने  कुछ  सीखा  नहीं  l   इसलिए  अब  स्वयं  प्रकृति  ने   दुनिया  को    सिखाने  का  जिम्मा  लिया  है  जैसे  --- किसी  से  मिलो  तो  कुछ  दूरी   बनाकर  रहो  ,  न  गले  मिलो , न  हाथ  मिलाओ ,  केवल  नमस्ते  करो l     किसी  का  झूठा  पानी  न  पिओ ,  न  ही  झूठा  खाना  खाओ  l
  पर - पुरुष , पर - नारी  के  साथ  एक  आसन   पर  मत  बैठो  l   संयमित  जीवन  जिओ  l
  मृत्यु  से  डर   कर  भागो  मत  l    सन्मार्ग  पर  चलो ,  सत्कर्म  की  पूंजी  इकट्ठी  करो   l
  मौत  के  अनेक  बहाने  होते  हैं  और  जीवन  रक्षा  के  अनेक  सहारे  होते  हैं  l   हमारे  द्वारा  किये  जाने  वाले  सत्कर्म   अकाल  मृत्यु  से  हमारी  रक्षा  करते  हैं  l

Friday, 7 June 2019

समाज जागरूक हो

  अपराध  छोटा   हो  या   बड़ा    उस  पर  नियंत्रण  व  अपराधी  को  सजा  जरुरी  है  l  लेकिन  जब  अपराधी  संगठित  हो   कर  एक  मजबूत  श्रंखला  बना  लेते  हैं   तो  सबसे  बड़ी  समस्या  यह  होती  है  कि  सजा  कौन  दे  ?   हर  व्यक्ति  अपने  स्वार्थ ,  कामना , वासना  और  विभिन्न  कमजोरियों  के  आगे  विवश  होता  है  ,  अपनी - अपनी  दुकान  चलती  रहे   इस  कारण  हर  अपराधी   दूसरे   को  संरक्षण  देता  है   l
 सब  समस्याओं  का  एकमात्र  हल है --- संवेदना  l   कहने  को  आधुनिक  युग  है  ,  लेकिन  चेतना  के  स्तर  पर    क्या  है  ?   स्वयं  का  आंकलन  प्रत्येक  व्यक्ति    करे  l  अपनी  कमजोरियों  को  समझें    और  उसे  दूर  करें  ,  तभी  समाज  में  शांति  संभव  है   l 











Monday, 3 June 2019

विचारों का परिष्कार जरुरी है

विभिन्न  धर्मों ,  जातियों  और  समाज  में  युगों  से  महिलाओं  पर  अत्याचार  किये  गए   l  अब  महिला   सशक्तिकरण  के  नाम  पर  देश - दुनिया  में  बहुत  काम  हो  रहे  हैं   लेकिन  जब  तक  पुरुष  वर्ग  की  मानसिकता  नहीं  बदलती  तब  तक  इन  विभिन्न  प्रयासों  से  कोई  सच्चा    लाभ  नहीं है  l  देखने  में  तो   यह  स्पष्ट   है  कि    महिलाएं  उच्च  व  महत्वपूर्ण  पदों  पर  हैं    लेकिन  सशक्त  वे  तभी  कहलाएंगी  जब  वे  अपने  विवेक  और  अपने  स्वयं  के  ज्ञान  व  समझ  से  निर्णय  लेंगी   l  दुर्भाग्य  यह  है  कि   जो  महिलाएं   पुरुषों  के  स्वार्थ , भ्रष्टाचार  आदि  गलत  कार्यों  में  सहयोग  न  दें   उन्हें   उपेक्षित  व  अपमानित किया  जाता  है   l  जो  अपने  विवेक  से  कार्य  करे ,  पुरुष  प्रधानता  को, सामंती  व्यवस्था  को    चुनौती  दे   उन्हें  वृहद  स्तर  पर  अपमानित करने  व  '  चिढ़ाने  '  जैसा  तुच्छ  कार्य  किया  जाता  है  l   यह  सशक्तिकरण  नहीं  है  l  समस्या  विकट  तब  और  हो  जाती   है  जब  महिलाएं  ही  अपनी  किन्ही  कमजोरियों  के  कारण   किसी  महिला  को  उत्पीड़ित  करने  के  लिए  ,  उसके  विरुद्ध  षड्यंत्र  रचने  के  लिए   पुरुषों  का  साथ  देने  लगती  हैं  l   सामाजिक  स्थिति  चाहे  वह  महिलाओं  की   हो  या  दलितों  की ,  उसमे  सुधार  तभी  संभव  है   जब  लोगों  के  ह्रदय  में  संवेदना  होगी  , मानवता  होगी ,  उनके  विचार  परिष्कृत  होंगे   l  

Saturday, 30 March 2019

विचार श्रेष्ठ और सकारात्मक हों

  कहते  हैं  --विचार  कभी  नष्ट  नहीं  होते  ,  एक  बंद  कमरे में  ,  एक  गुफा  में  बैठ  कर  भी  आप  विचार  करेंगे  तो  वे  संसार  में  फैल  जायेंगे  और  अपना  प्रभाव  दिखायेंगे  l    मजदूरों  की  दीन-  हीन   दशा  को   सुधारने   के    लिए , शोषण  से  मुक्ति  के  लिए    कार्ल  मार्क्स  ने  क्रांतिकारी  विचार  प्रस्तुत  किये  ,  इससे  पूंजीपति  भयभीत  हो  गए  ,  उन  पर  तरह - तरह   से  प्रतिबन्ध  लगाये  गए  ,  देश - निकला  भी  दिया  गया   l  लेकिन  उनके  विचार  सारे  संसार  में  फैल  गए   और  उनका  प्रभाव   समाज  में , संसार  में  देखा  जा  सकता  है  l
  आज  समाज  में  जो  अत्याचार  और  अन्याय  बढ़  रहा  है  ,  वीरता  समाप्त  हुई  है  कायरता  बढ़ी  है   l किसी  भी  अपराध  के  पीछे  वास्तविक  अपराधी  कौन  है  ?  यह  जानना  भी  कठिन  हो  गया  है  l   ऐसे  समय  में  यदि   हमारी  कल्पनाएँ ,  हमारे  विचार   श्रेष्ठ  और  सकारात्मक  हों   l  विचार  के  साथ  आचरण  भी  श्रेष्ठ  हो   तो  सुधार  संभव  है   l   

Friday, 29 March 2019

धन और पद के लालच से मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है

 जब  व्यक्ति  का  लोभ  व  लालच   मर्यादा  की  सीमा  रेखा  पार  कर  जाता है   तब  ऐसा  व्यक्ति  कायर  व  संवेदनहीन  हो  जाता  है   और  अपने  साथ  ऐसे  कायर व  संवेदनहीन  लोगों  की  भीड़  इकट्ठी  कर  लेता  है   और  इनके  पास सिर्फ  एक  ही  काम  होता  है   कि  हर  उचित - अनुचित  तरीके  से   योग्य  व्यक्ति  को  आगे  मत  आने  दो ,  अन्यथा  उनकी   अयोग्यता   का  पर्दाफाश  हो  जायेगा  l  गलत  तरीके  से  जो  साजो - सामान ,  वैभव  इकट्ठा  किया  है , उन्हें    उसका  भय  सताता  है  l  इस कारण  ऐसे  कायर  व्यक्ति  अपनी  योग्यता  नहीं  बढ़ाते ,   अपनी  सारी  शक्ति  योग्य  व  कुशल  व्यक्ति  को  पीछे  धकेलने  में  लगा  देते  हैं  l
  अँधेरा  कितना  भी  घना  हो ,  आखिर  सूर्योदय  तो  होता  ही  है  l
  गुलामी  के  दिनों  में  अंग्रेजों  ने   भारतीयों  को  बहुत  दीन- हीन  व  कमजोर  समझा ,  बहुत  अत्याचार  किये   l  उन  विपरीत  परिस्थितियों  में  भी  अनेक  महान  व्यक्ति  हुए  जिनके  प्रयासों  से  देश  को  आजादी  मिली  l  बुद्धिमानी  इसी  में  है   कि  दूसरों  को  धक्का  देकर  आगे  बढ़ने  के   बजाय  अपनी  योग्यता   बढ़ाओ  l 

Thursday, 21 March 2019

अनजाने भय के कारण व्यक्ति सत्य से दूर हो जाता है

  मनुष्य  अपनी  दुर्गति  के  लिए  स्वयं  जिम्मेदार  है  l  आज  कर्मकांड  तो  बहुत  हैं  लेकिन  लोगों  को  ईश्वर  की  सत्ता  में  विश्वास  नहीं  है  l   यही  कारण  है  कि  प्रत्येक  व्यक्ति   अपने  से  थोड़े  भी  ताकतवर  को  अपना  भाग्य विधाता  मान  कर  उसकी  गुलामी  शुरू  कर  देता  है   l   बेजान  चीजों  में  लोग  संसार  के  आश्चर्य  देखने   जाते  हैं   लेकिन  संसार  का  सबसे  बड़ा  आश्चर्य ---- वे  जीते - जागते  प्राणी  हैं  ,  जो  हर  तरह  से  संपन्न  हैं  ,  समाज   में  जिनकी  अलग  पहचान  है  ,  अनेकों  को  प्रभावित  भी  करते  हैं ,  ईश्वर  ने  उन्हें  सब  कुछ  दिया  है   लेकिन  अपनी  कमजोरियों  के  कारण  वे  मानसिक  गुलाम  हैं  l 
  एक  मजदूर  जो  दिन  भर  मजदूरी  करता  है ,   मेहनत    से  कमाता  है  और  स्वाभिमान  से   जीवन  जीता  है   लेकिन  संपन्न  और  समर्थ  व्यक्ति   किसी  न  किसी  के  हाथ  की  कठपुतली  बन  कर  रहता  है   l   आज  सबसे बड़ी  जरुरत  है  कि  प्रत्येक  व्यक्ति  सद्बुद्धि  की  प्रार्थना  करे   क्योंकि  ' यूज  एंड  थ्रो '    केवल  बेजान  चीजों  पर  लागू  नहीं  होता  l
   सद्बुद्धि  होगी ,  तभी  विवेक  होगा   l  विवेकशील  व्यक्ति  ही  स्वाभिमानी  होगा  l  निरंतर   सद्बुद्धि  की  प्रार्थना   करने  से   युगों  से  जो  गुलामी  की  आदत  बनी  हुई  है ,  वह  धीरे - धीरे  जाएगी  l  और  तभी  एक  स्वस्थ  समाज  का  निर्माण  होगा   l   

Wednesday, 20 March 2019

स्वविवेक जरुरी है

   व्यक्ति  कितना  भी  पढ़ - लिख  जाये ,  उच्च  पद  पर  पहुँच  जाये   , लेकिन  यदि  वह  स्वविवेक  से  काम  नहीं  लेता   तो  उसकी  शिक्षा  व्यर्थ  है  l   अधिकांश  लोग  कान  के  कच्चे  होते  हैं  ,  बिना  देखे ,  बिना  सोचे - समझे  दूसरों  की  बात  का  विश्वास  कर  लेते  हैं  l   अधिकांश  लोग  धन  का  लालच ,  अपनी  असीमित  कामना , वासना  के  कारण  अपना  जीवन  कठपुतली  बन  कर  ही  गुजार  देते  हैं   l  समाज  में  जाति,   धर्म  आदि  को  लेकर  झगड़े, दंगे   मनुष्य  की  इसी  कमजोरी  के  कारण  होते  हैं  l 
 अधिकांश  संस्थाओं  में   अधिकारियों  से मन - मुटाव ,  विभागीय झगड़े  इसी  कारण    उत्पन्न  होते हैं   l  एक  पक्ष   , दूसरे  पक्ष  से    उन  गलतियों  की  वजह  से   चिढ़ा  हुआ  है ,  जो   दूसरे  पक्ष  ने  कभी  की  ही  नहीं  l  स्वविवेक  न  होने  के  कारण  ही  आज  मनुष्य  ' बिकाऊ '  है  l   गरीबी , भुखमरी , दिवालिया  आदि  कारणों  से   कोई  व्यक्ति   अपना  घर - परिवार  बेच  दे ,  स्वयं  को  भी  बेच  दे  ,  तो  यह  उसकी  मज़बूरी  है   लेकिन   हर  तरह  से  संपन्न  लोग जब   अपना  स्वाभिमान  गिरवी  रखकर  , किसी  के  हाथ  की कठपुतली  बन  जाते  हैं  ,  मानसिक  गुलाम  बन  जाते  हैं   और  ऐसा  कर  के  बहुत  खुश  भी  होते  हैं ---- तो  यह  उनकी  दुर्बुद्धि  है  l
  आज  की  सबसे बड़ी  जरुरत  है  कि  बच्चों  को  शिक्षा  के  साथ  स्वाभिमान  से  जीना  सिखाया  जाये  l  भौतिक  प्रगति  ही  विकास का  मानदंड  नहीं  है  l  परिवार   और  देश  का  उत्थान   उसके  सदस्यों  के  श्रेष्ठ  चरित्र  से  होता  है   l    

Thursday, 31 January 2019

सत्य में हजार हाथियों का बल होता है , सत्य कभी पराजित नहीं होता

 इस  संसार  में  सदा  से  ही  अच्छाई  और  बुराई  में  संघर्ष  चलता  रहता  है  l  बुराई  के  पास  स्वयं  को  जीवित  रखने  का  केवल  एक  ही  तरीका  है   कि   सच्चाई  की  राह  पर  चलने  वालों  को  हर  संभव  प्रयास  कर  के  आत्महीनता  की  स्थिति  में  पटक  दे ,  जिससे  वे  तरक्की  न कर  पायें  और   बुराई  का  साम्राज्य  कायम  हो  जाये  l   इसलिए  सत्य  की  राह  पर  चलने  वालों  को  जागरूक  रहना  चाहिए ,  किसी  भी  परिस्थिति  में  अपना  आत्मविश्वास  डिगने  न  दे  l  आत्मविश्वास  ही  ईश्वर  विश्वास  है  l  अंधकार  कितना  भी   क्यों  न  हो  , सुबह  अवश्य  होती  है  l 

Wednesday, 30 January 2019

नकारात्मक विचारों के लोगों से स्वयं को दूर रखें

   इस   संसार  में  भांति - भांति  के  लोग  हैं  l  मनुष्य  एक  सामाजिक  प्राणी  है  और  वह  समाज  में  मिलजुलकर  रहना  चाहता  है  l  समाज  में  अनेक  लोग  ऐसे  होते  हैं  जिनका  काम  हमेशा  दूसरों  में  कमियां  निकालना  होता  है  l  ऐसे  लोग  अच्छाई  में  भी  बुराई  खोजते  हैं  जैसे  कितना  भी  सुन्दर  पार्क  होगा  , मक्खी  वहां  गंदगी  को  ढूंढ कर   उसी  पर  बैठेगी  l  ऐसे  नकारात्मक  लोगों    से  हमेशा  दूर  रहना  चाहिए  क्योंकि  ऐसे  लोगों  के  साथ  रहकर  यदि  हर  बात  में  कमियां  खोजने  की  आदत  पड़  जाये  तो  व्यक्ति  जीवन  में  कभी  खुश  नहीं  रह  सकता ,  हमेशा  तनाव  में  रहेगा  l
  यदि  हम   हमेशा  गुणों  की  चर्चा  करेंगे ,  बुराई  में  भी  अच्छाई  को  ढूंढेंगे  तो  वातावरण  सकारात्मक  होगा   l  स्वस्थ  और  तनावरहित  जीवन  के  लिए  सकारात्मकता  जरुरी  है  l 

Sunday, 13 January 2019

संसार में अशांति का एकमात्र कारण है ---- सद्बुद्धि की कमी

   लोग  धन संपन्न  हों  ,  ऊँचे  पद  पर  हों  ,  बाहरी  तौर पर  बहुत  सुखी - संपन्न  दिखाई  देते  हैं   लेकिन   ऐसे  लोग  सामान्य  लोगों  से  ज्यादा  तनाव  में  रहते  हैं  l  जब  व्यक्ति  तरक्की  की  राह  पर  होता  है ,  सुख - वैभव  बढ़ता  जाता  है   तब  वह  अपने  सुखों  में  इतना  मग्न  हो  जाता  है  कि  अपनी  तरक्की  के  अनुपात  में  या  थोड़े   भी  सत्कर्म  नहीं  करता  l  कहते  हैं  विवेक , सद्बुद्धि  ईश्वर  की  कृपा  से  मिलती  है   और  ईश्वर  की  कृपा  सत्कर्म   करने   से , सन्मार्ग  पर  चलने  से    मिलती  है   विवेक  होने  पर  ही  व्यक्ति  अपने  जीवन  में  सही  निर्णय  ले  पाता  है    l   जीवन  में  एक  कदम  भी  गलत  हो   तो  मंजिल  तक  पहुंचना  कठिन  होता  है   l 

Thursday, 10 January 2019

सुख - शान्ति से जीने के लिए ईश्वर विश्वास जरुरी है

 केवल   कर्मकांड  करना    ईश्वर  विश्वास   नहीं  है   l जो  ईश्वर में  विश्वास  करते  हैं   वे  सदाचारी  होते  हैं ,  सेवा , परोपकार  के  कार्य करते  हैं ,  कर्तव्य पालन  ईमानदारी  से  करते  हैं  l  इस  संसार  को  सुन्दर  बनाने  के  लिए  अपनी  सामर्थ्य  भर  प्रयास करते  हैं  ताकि  ईश्वर  की  कृपा  मिल  सके  l  ऐसे   लोग कभी  भयभीत  नहीं  होते  ,  उन्हें  ईश्वर  की  सत्ता में  विश्वास  होता  है   कि  जो  होगा  अच्छा  होगा ,  उसी में  हमारी  भलाई  होगी  l 
  आज  की  सबसे  बड़ी  समस्या  यह  है कि  व्यक्ति  सदाचारी  जीवन  नहीं  जीता  l  अपनी  कामना , वासना  ,लालच ,  ईर्ष्या - द्वेष  के  कारण  वह  जीवन  में   अनेक   ऐसे  काम  करता  है  जिनके  लिए  उसकी  आत्मा  गवाही  नहीं  देती  , आत्मा  को  कष्ट  होता  है   इससे  तनाव  उत्पन्न  होता  है  ,  मन  बोझिल  बना  रहता  है  l  अपने  विकारों  को  दूर  कर  के  ही  शांति  से  रहा  जा  सकता  है  l   

Thursday, 20 December 2018

आत्मविश्वासी ही सुख - शांति से जी सकता है

    भौतिक  द्रष्टिकोण  से  मनुष्य  चाहे  कितनी  भी  तरक्की  कर  ले  ,   वह  तब  तक  अधूरी  है  जब  तक  मन  के  विकारों  पर ---- ईर्ष्या - द्वेष ,  कामना , वासना  पर  उसका  नियंत्रण  नहीं  है  l  जब  ये  दुष्प्रवृत्तियां   उस  पर  हावी  हो  जाती  हैं   तो  उसकी  हालत  पशु , राक्षस  या  अर्द्ध विक्षिप्त  जैसी  हो  जाती  है   l   ये  बुराइयाँ  आदि  काल  से  हैं  और  इन्ही  के  कारण    बड़े - बड़े  युद्ध  हुए   l
  लोगों  को  बदलना ,  समझाना  बड़ा  मुश्किल  है  ,  उचित  यही  है  कि  हम  स्वयं  के  बदलें  l  सर्वप्रथम  आत्मविश्वासी  बने  ,  किसी  के  द्वारा  की  जा  रही  अपनी  निंदा ,  प्रशंसा  ,  मान - अपमान  के  प्रति  तटस्थ  रहे  l  जो  ऐसा  कर  रहा  है  ,  वह  उसकी  प्रवृति  है ,  वह  अपनी  आदत  से  लाचार  है   लेकिन  यदि  हम  आत्मविश्वासी  हैं   तो  उसका  हर  दांव  निष्फल  हो  जायेगा   l  

Monday, 26 November 2018

सुख - शांति के लिए समस्या पर नहीं , उसके समाधान पर विचार करना चाहिए

 जीवन  में   जब  भी  परेशानियाँ  आती  हैं   तो  हमें   उसके  समाधान  पर  गहराई  से  विचार  करना  चाहिए  l  समस्या  पर  परिवार   , मित्रों  व  रिश्तेदारों  से  समस्या  की  बार - बार  चर्चा  करने  से   वह  समस्या और  बढ़  जाती  है  l   धैर्य और  शांति  से  विचार  करने  से समाधान  अवश्य  मिल  जाता  है  l
     सामाजिक  समस्याएं  तो  कुछ  लोगों  के  अहंकार  और  स्वार्थ  की  वजह  से  उत्पन्न  होती  है  l  लोगों  में  स्वार्थ  और  यश कमाने  की  लालसा  इतनी  तीव्र  होती  है   कि   वे  समस्याओं  को  हल  होने  ही  नहीं  देते   l 

Saturday, 24 November 2018

बदलते समय के अनुसार रोजगार के मायने भी बदल गए

  कभी    जब  व्यक्ति  को  दस  बजे  से  शाम  पांच  बजे  तक    काम  मिल  जाये  तो   माना  जाता  था  कि  उसे  रोजगार  मिल  गया  l  अब  वक्त  बदल  गया  ,  अब  व्यक्ति  बोलना ,  सुनना ,  हँसना  ,  चिल्लाना ,  नारे  लगाना ,  बैठना , खड़े  होना  हर  बात  के  पैसे  कमाने  लगा  है  l  पेट  भरने  के  लिए    यह   बुरा  नहीं  है   l  उर्जा  का सदुपयोग  होना  जरुरी  है  l  

Thursday, 22 November 2018

प्राथमिकता का चयन जरुरी है

  व्यक्तिगत  जीवन  हो  या   अन्य   कोई  भी  क्षेत्र  हो   तनाव रहित  जीवन  जीना  चाहते  हैं  तो  प्राथमिकता  का  चयन  करना  जरुरी  है  l  आज के  समय  में  अनेक  लोग  अपनी  जिम्मेदारियों  से  भागने  के लिए  पूजा -पाठ  कर्मकांड  को  एक  माध्यम  बना   लेते   हैं  l    इससे  न  तो  भगवान  प्रसन्न  होते  हैं  और  न  ही  संसार  में  सफलता  मिलती  है   l  जीवन  में  संतुलन  जरुरी  है   l  परिवार  में,  समाज  में    अपनी  जिम्मेदारियों  को   निभाने  और  ईमानदारी  से  कर्तव्यपालन  करने  के   साथ   कुछ  क्षण  भी  ईश्वर  का  नाम  लिया  तो  वह  सार्थक  है   l  ईश्वर  का निवास  तो   हमारे  ह्रदय  में  है  ,  उन्हें  जाग्रत  करना  जरुरी  है  l  

Saturday, 20 October 2018

दुष्प्रवृतियों को त्यागने से ही सुख - शांति संभव है

  आज  की  सबसे  बड़ी  विडम्बना  यह  है  कि  मनुष्य  सुख - शांति  तो  चाहता  है  ,  लेकिन  उसके  लिए  स्वयं  को  बदलने  को  तैयार  नहीं  है  l  समाज  का  बहुत  बड़ा भाग  आज   नशे  का  शिकार  है  l     भारत  एक  गर्म  जलवायु  का  देश  है  l   शराब ,  मांसाहार   उन  देशों  के  निवासियों  के  लिए   उचित है  जहाँ  ठण्ड  बहुत  पड़ती  है  l  भारत  जैसे  गर्म  जलवायु   में  रहने  वाले  लोगों  के  लिए   शराब  और  मांसाहार  जहर  का  काम  करता  है  ,  इसके  सेवन  से  बुद्धि  भ्रमित  हो  जाती  है  ,  मनुष्य  विवेकशून्य  हो  जाता  है  ,  सोचने - समझने  की  शक्ति  नहीं  रहती  ,  वक्त  पर  सही  निर्णय  नहीं  ले  सकते  l   शराब  के  अधिक  सेवन  से   व्यक्ति  चाहे  साधारण  हो  या  बड़ा  अधिकारी  हो  ,  बेहोशी  की  हालत  में  रहता  है  ,  और  कोई  भी  काम  जिम्मेदारी  से  नहीं  करता  है  l 
 शराब   के  साथ  फिर  गुटका , तम्बाकू ,  सिगरेट ,  और  समाज  में   विभिन्न  तरीके  से  परोसी  जाने  वाली  अश्लीलता  ---- इन  सबकी   वजह  से  ही   समाज  में  अपराध ,  हत्याएं ,  दुष्कर्म   और  प्राकृतिक  प्रकोप  बढ़े  हैं   l  जरुरी  है  कि  मनुष्य  अपना  हठ  छोड़कर  सन्मार्ग  पर  चले   l  

Thursday, 18 October 2018

स्वस्थ समाज का निर्माण जरुरी है

 अभी  तक  जो  विकास  हुआ  है  वह  भौतिक  है   l  मनुष्य  के  व्यक्तित्व  के  दो  पक्ष  हैं -- आंतरिक  और  बाह्य  l  यह  विकास  बाह्य  है  l  आंतरिक  द्रष्टि  से  मनुष्य  अभी  भी   असभ्य  है  ,  पशु - तुल्य  है  ,  उसके  भीतर  का  राक्षस  अभी  मरा  नहीं  है  l    ऐसा  इसलिए  है  क्योंकि  जीवन  को  सुख - सुविधा संपन्न  बनाने  के  तो  बहुत  प्रयास  हुए  ,  लेकिन  आत्मिक  विकास  के  कोई  प्रयास  नहीं  हुए  l   इसलिए  धर्म ,  जाति  के  नाम  पर  बहुत  अत्याचार  हुए ,  अमीरी - गरीबी  का  भेदभाव  अपने  चरम  पर  है ,  युगों  से  महिलाओं  पर  अत्याचार  हुए  l  अत्याचार , अन्याय  इसलिए  भी  बढ़ता  गया   क्योंकि  समर्थ  पक्ष  ने  समाज  के  प्रमुख  लोगों  और  धर्म  के  ठेकेदारों  को  अपने  पक्ष  में  कर  इस  बात  को  लोगों  के  दिलोदिमाग  में  भरा  कि  जो  पीड़ित  हैं  उनका  भाग्य  ही  ख़राब  है  और  उनका  जन्म  अत्याचार  सहने  के  लिए  ही  हुआ  है  l
  अन्याय  और  अत्याचार  के  विरुद्ध  आवाज  न  उठाने  से  अत्याचारियों  के  हौसले  बुलंद  होते  गए   और  उन्होंने  दूसरों  को  सताना ,  अपनी  हुकूमत  चलाना ,  अपने  से  तुच्छ  समझना ,  उत्पीड़ित  करना  अपना  जन्म  सिद्ध  अधिकार  समझ  लिया  l  धीरे - धीरे  यह  उनकी  आदत  बन  गई   और  खानदानी  बीमारी  की  तरह  एक  पीढ़ी  से  दूसरी  पीढ़ी  में  आती  रही   l
  पीड़ित  पक्ष  को  अपनी  भाग्यवादी  सोच  को  बदलना  होगा  कि---  यह  दुर्भाग्य  नहीं , कमजोरी  है  l 
अपने  ज्ञान ,  जागरूकता ,  संगठन  और  आत्मबल  के  सहारे  ही   अत्याचारी  का  मुकाबला  किया  जा  सकता  है   l   

Wednesday, 17 October 2018

संसार में सुख - शान्ति के लिए ह्रदय की पवित्रता अनिवार्य है l

आज  संसार  में  अशान्ति  का  सबसे  बड़ा  कारण  है  --- मनुष्य  के  मानसिक  विकार -- काम , क्रोध , लोभ , मोह , अहंकार  आदि  l  यह  सब  विकार  मनुष्य  के  ह्रदय  को  अपवित्र  कर  देते  हैं   और  इसी  अपवित्रता  के  कारण  विभिन्न  अपराध , दंगे - फसाद होते  हैं   l  शारीरिक  शुद्धता  का  कोई  मतलब  नहीं  होता  क्योंकि  सबके  शरीर  में  चाहे  वह  पुरुष  हो  या  नारी  मल-मूत्र ,  खून  और  न  जाने  क्या - क्या  भरा  है  जो   चिकित्सा  के  उपकरण  की  सहायता  से  देखा  जा  सकता  है  l  लेकिन  मन  के  विकारों  को  किसी  उपकरण  की  सहायता  से  देखा  नहीं  जा  सकता  ,  यह  तो  व्यक्ति  की  क्रिया  और  उसके  परिणामों  से समझ  में  आता  है   l  इन  विकारों  की  वजह  से  मनुष्य  की  बुद्धि  भ्रमित  हो  जाती  है   और  वह   अनैतिक ,  अमर्यादित  कार्य  कर  के  संसार  में  अशांति  उत्पन्न  करता  है  l  इसलिए  हमारा  सारा  प्रयास  मन  को  पवित्र  बनाने  पर  होना  चाहिए   l  

Tuesday, 16 October 2018

दोगलापन समाज के लिए अभिशाप है

 कहते  हैं  -- अच्छाई  में  गजब  का  आकर्षण  होता  है  ,  इसलिए  पापी  से  पापी  भी  अपने  परिवार  में ,  समाज  में  स्वयं  को  अच्छा  दिखाना  चाहता    है  l  उसके  व्यक्तित्व  के  अँधेरे  पक्ष  पर ,  उसके  अवगुणों  पर  परदा  पड़ा  रहे  ,  इसके  लिए    ऐसे  लोगों  को   कितनों  के  आगे  नाक  रगड़नी  पड़ती  है ,  कितने  ही  लोगों  को   मुंह  बंद  रखने  के  लिए  धन  देना  पड़ता  है   l  फिर  इस  धन  को  कमाने  के  लिए  बेईमानी ,  भ्रष्टाचार  करना  पड़ता  है  l   किसी  गड़बड़ी  में  फँस  न  जाएँ ,  यह  तनाव  दिमाग  में  रहता  है   l  इस  तनाव  को  दूर करने  के  लिए  नशा  करते  हैं   l  धीरे - धीरे  जीवन  पतन  के  गर्त  में  गिरता  जाता  है  l 
   बाह्य  रूप  से  देखने  पर  ऐसे  लोगों  का  सुख - वैभव  का  जीवन  दिखाई  देता  है   लेकिन  वास्तविकता  में   कितनी  ' बेचारगी '  है  l 
  मनुष्य  अपनी  कमजोरियों  के  कारण  ही  अपनी  दुर्गति   कराता  है  l  बेहतर  यही  है    कि  जैसे   वास्तव  में  हैं ,  वैसे  ही  दिखाई  दें   l  कहते  हैं -- मनुष्य  के  व्यक्तित्व  में  इतने  छिद्र  होते  हैं   कि  एक  दिन  सच्चाई  बाहर  आ  ही  जाती  है  l  अपनी  कमजोरियों  को  ,  अपनी  गलती  को  स्वीकार  करना   ही  सबसे  बड़ी  वीरता  है   ,  ऐसा  कर    के  ही  व्यक्ति  तनावरहित  जीवन  जी  सकता  है   l  

Sunday, 14 October 2018

अपराधी का सबसे बड़ा दंड है ---- उसका बहिष्कार करो

  यह  समाज  पुरुष  और  नारी  से  मिलकर  बना है   l  मनुष्य  की   दुष्प्रवृत्तियों  के  कारण  ही  अपराध  होते  हैं   l  महिलाओं  का  चरित्र  हनन  और  छोटे - छोटे  बच्चे - बच्चियों  के  साथ  जो  जघन्य  अपराध  होते  हैं   उनके  सबूत,  गवाह  आदि   नहीं  मिल   पाते  ,  अधिकांश  अपराधी  बच  जाते  हैं  ,  समाज  में  रौब  से  घूमते  हैं ,  निरंकुश  हो  कर  और  अपराध करते  हैं  l   जो  सच  है , उसे  परिवार  व  समाज  जानता  है   इसलिए   अपना  दिल  मजबूत  कर  अपराधी का  परिवार ,  समाज  व  कार्यस्थल में  बहिष्कार  अवश्य  करें  l     न्याय  की  प्रक्रिया   होती  है ,  प्रकृति  से  भी  दंड  ' काल ' निर्धारित  करता  है  l  कम  से कम   अपराधी  का  बहिष्कार  कर  के ,  उससे  दूरी  बनाकर     समाज  को  जागरूक  किया  जा  सकता  है   l  इससे  अनेक  लोग  अपराधी  के  चंगुल  में  आने  से बच  जायेंगे   और  अपराध  पर  नियंत्रण  अवश्य  होगा   l