Wednesday, 29 November 2017

सुख -शांति से जीना है तो किसी को देखकर परेशान न हों

 इस  संसार  में  भांति - भांति  के  लोग  हैं  ,  उनका  बाहरी  रूप , व्यवहार  , हाव - भाव  आदि  देखकर   उनके  भीतर  की   सच्चाई   क्या  है   ?  इसे  नहीं  समझ  सकते   l    जैसे   दो  लोग  एक - दूसरे  की  बड़ी  तारीफ  कर  रहे  है  ,  बात - बात  में  परस्पर  प्रशंसा  कर  एक - दूसरे  को  खुश  करने  का  प्रयास  कर  रहे  हैं   तो  इसका  अर्थ  यह  नहीं  कि  वास्तव  में   यह  सच्ची  प्रशंसा  है  l  संभव  है  वे  दोनों   एक  दूसरे  को  खुश  कर  , अपने  सहयोगियों  के  माध्यम  से   कोई  बहुत  बड़ा  स्वार्थ  सिद्ध  करना   चाहते  हों  l    यह   संसार  ' गिव  एंड  टेक '  से  चलता  है  l
  जो  व्यक्ति  वास्तव  में  अच्छा  है ,  जिसमे  छल - कपट  नहीं ,  किसी  का  अहित  नहीं  करता ,  संभव  है  अनेक  लोग  उसे  भला - बुरा  कह  रहे  हों ,  हर  जगह  उसकी  आलोचना  हो ---- ऐसी  स्थिति  में  हमें  कभी  निराश  नहीं  होना  चाहिए    क्योंकि   दुष्टता  अपने  अस्तित्व  को  बनाये  रखना  चाहती  है ,  यदि  अच्छाई  आ  गई  तो  उनका   नामोनिशान  मिट  जायेगा  l  इसलिए  ऐसी  दुष्प्रवृत्ति  के  लोग    अपने  ऐसे  अनेक   साथी  तैयार  कर  लेते  हैं   जिनका  काम  अच्छे  और  सच्चे  व्यक्ति  के  खिलाफ  लोगों  के   मन  में  जहर  भरना  है ,  उनका  माइंड  वाश  करना  है  l  आज  के  समय  में  बड़े  धैर्य  और  विवेक  की  जरुरत  है  कि  हम  अपने  अस्तित्व  को  भी  बनाये  रखें  और  अपने  मन  को  गिरने  न  दें  l  क्योंकि  सच्चाई  कभी  छुप  नहीं  सकती   l  

Tuesday, 28 November 2017

अशांति का कारण है ----- कायरता

कहते  हैं '  कायरता   समाज  का  सबसे  बड़ा कलंक  है   और  अशांति  का  सबसे  बड़ा  कारण  है  l '
     यदि  व्यक्ति  को  यह  समझ  आ  जाये  कि  कोई  उससे  दुश्मनी  क्यों  रखे  है   ? क्यों  उसका  अहित  करना  चाहता  है  ?   तो  शांत  प्रवृति  का  व्यक्ति  उस   दुश्मनी  के  कारण  को  दूर  करने  का  प्रयत्न  करेगा   ताकि  दोनों  लोग  शांति  से  रह  सकें  l  लेकिन  आज  के  समय  में  धन ,  पद  का  लालच  ,  ईर्ष्या - द्वेष    दुश्मनी  के  ऐसे  कारण  हैं  जिनका  कोई  समाधान  नहीं  है  l   इन  सबके  अतिरिक्त   अशांति  का  जो  सबसे  बड़ा  कारण  है   वह  यह  कि  लोग  नैतिकता ,  मर्यादा ,  संवेदना  जैसे  सद्गुणों  को  भूल  गए  हैं   l  लोग  अपने  अनैतिक  और  गैर कानूनी  कार्य  दूसरे  की  मदद  से   करना  चाहते  हैं  ,  दूसरे  के  कंधे  पर  रखकर बन्दूक  चलाना  चाहते  हैं  l   और  जो  उनके  ऐसे  कार्यों  में  सहयोग  न  दे , उनके जाल  में  न  फंसे ,  उसकी    खैर  नहीं  l   आज  हम  सब  को  मिलकर  समाज  की  सद्बुद्धि  के  लिए  प्रार्थना  करनी  चाहिए   क्योंकि    अधिकांश  व्यक्ति   अपनी  कमजोरियों  और  दुष्प्रवृत्तियों  के  कारण  अपने  स्वाभिमान  को  गंवाकर  किसी  न  किसी  के  हाथ  की  कठपुतली  बने  रहते  हैं  ,  इसकी  डोर   किसके  हाथ  में  है  वे  स्वयं  नहीं  जानते  l    जब   समाज  का  वातावरण  ऐसी  दुष्प्रवृत्तियों    की   वजह  से  विषाक्त  हो  जाये    तब  लोगों  को   अधिक  से  अधिक  मात्रा  में  निष्काम  कर्म ,  पुण्य  कार्य  करने  चाहिए    जिससे  नकारात्मकता  दूर  होगी   l 

समाज में नकली चेहरा लगाये हुए अपराधियों से निपटना जरुरी है

 आतंकवाद  से  तो  संसार  की  बड़ी - बड़ी  शक्तियों  के  साथ  मिलकर  निपटा  जा  सकता  है   लेकिन  देश  में  ही  जो  लोग  शराफत  का  नकाब  पहन  कर  अपराध  करते  हैं ,  लोगों  को  मानसिक  रूप  से उत्पीड़ित  करते  है  ,  कन्याओं  और  छोटे  बच्चों  को  सताते  हैं ,  ऐसे  अपराधी  और  उन्हें  संरक्षण  देने  वाले   बच  जाते  हैं   और  फिर  बड़े  अपराधों  को  अंजाम  देते  हैं  ---- इन्हें  क्या  नाम  दिया  जाये  ?    इन्हें  समाप्त  करना  जरुरी  है   क्योंकि  ये  लोग  अपने  स्वार्थ  के  लिए  किसी  से  भी  साठ - गाँठ  कर  सकते  हैं   l 
  एक - एक  सीढ़ी  चढ़कर  ही  आगे  बढ़ा  जा  सकता  है  ,  यदि  संसार  का  प्रत्येक  राष्ट्र   निष्पक्ष  होकर  अपने - अपने  देश  के  अपराधियों  को  कठोर  सजा  दे ,  उन  पर  सख्त  नियंत्रण  रखे   तो  अपने  आप  ही   पूरे   संसार  में  शांति  हो  जाये  l   

Wednesday, 15 November 2017

दंड का भय न होने से अपराध बढ़ते है

     यदि  समाज  में  ऊँच - नीच , छोटे - बड़े ,  अमीर - गरीब  आदि  भेदभाव  न  करके  प्रत्येक  अपराधी  को  उसके  अपराध  के  लिए  दंड  दिया  जाये  ,  तो  लोग  अपराध  करने  से  डरेंगे  l   लेकिन  ऐसा  होता  नहीं  है  l  जब  लोग   जानते  हैं   कि  वे  कैसा  भी  अपराध  करें  उनके  '  आका '  उन्हें   दंड  से  बचा  लेंगे ,  समाज  उन्हें  बहिष्कृत  नहीं  करेगा  बल्कि  अपने  छोटे - बड़े    स्वार्थ  को  पूरा  करने  के  लिए   उनकी  पहचान  से  फायदा  उठाएगा  ,  तब  ऐसे  लोग  अपनी - अपनी  मानसिकता  के  अनुरूप  कभी  खुलकर  ,  कभी  छुपकर घोर  अपराध  करते  हैं  l    जो  लोग  प्रत्यक्ष रूप  से  अपराध  कर  रहे  हैं ,  वे  तो  अपराधी  हैं  ही ,  लेकिन  जो  लोग   इन  अपराधियों  को  शह  देते  हैं ,  कानून  से  बचने  में  उनकी  हर  संभव  मदद  करते  हैं ,  अपने  अनैतिक  कार्य  और  बड़े - बड़े  स्वार्थ  उनसे  पूरे  कराते  हैं ,  वे  भी  उन  अपराधों  में  बराबर  के  भागीदार  हैं  l   अब  समाज  को  जागरूक  होना  पड़ेगा  ,  संगठित  होना  होगा   कि  अपराधियों  को   बहिष्कृत  करे ,  चाहे  उनका  समाज  में  कोई  भी  स्टेटस  हो  l
   आज  की  सबसे  बड़ी विडम्बना  यह  है  कि  लोग  अपनी  दुर्बुद्धि  के  कारण  और  अपराधियों  के  खौफ  के  कारण   अपराधियों  का  ही साथ  दे  रहे  हैं  और  अच्छाई  को  बहिष्कृत  कर  रहे  हैं   l  जागरूकता  जरुरी  है  l 

Saturday, 14 October 2017

मानसिक प्रदूषण अशांति का बड़ा कारण है

   नशा , मांसाहार , निम्न  स्तर  का  साहित्य   और  वैसी  ही  फिल्म  देखने   आदि  अनेक  कारणों  से  आज  लोगों  की  मानसिकता  प्रदूषित  हो  गई  है   और  इस  प्रदूषण  ने  बच्चे , युवा ,  प्रौढ़ , वृद्ध  सबको  अपनी  गिरफ्त  में  ले  लिया  है   l  इसी  कारण  समाज  में  अपराध  में  वृद्धि  हुई  है  ,  दंड  का  भय  न  होने  से  पाशविकता  और  बढ़ती  जाती  है  l 
     प्रत्येक  व्यक्ति ,  प्रत्येक  परिवार  स्वयं  अपना   सुधार  करे    तभी  सकारात्मक  परिवर्तन  संभव  होगा  l 

Thursday, 12 October 2017

धन के लालच ने वर्ग भेद और जाति - भेद और ऊँच - नीच के मायने बदल दिए

  समाज  में  एक  वर्ग  ऐसा  तैयार  हो  गया  है   जिसका  उद्देश्य   हर  तरीके  से  धन  कमाना ,  लोगों  पर  प्रभुत्व  जमाना   और  अपनी  झूठी  शान  को  बनाये  रखना  है  l   जो  उनके  इस  ' स्वार्थ '  में  मदद  करते  हैं   उनकी  कठपुतली  बन  कर  रहते  हैं  ,  उन्हें  हर  तरह  का  लाभांश  मिलता  रहता  है  , फिर  उनकी  जाति,  धर्म , वर्ग  कुछ  भी  हो  कोई  फरक  नहीं  पड़ता , पुरुष  हो  या  महिला  हो ,  उनके  इशारों  पर  चले  तो  ठीक  अन्यथा   जीना  मुश्किल  कर  देंगे  l  यह  वर्ग  ' एक्स '  है
  दूसरा  वर्ग   ' वाई ' वह  है  जिसका  विवेक  जाग्रत  है  ,  वह  किसी  के  हाथ  की  कठपुतली  नहीं  बनता , ईमानदारी  से  जीता  है ,  ईमानदारी  उसकी  मजबूरी  नहीं   उसका  स्वभाव  है ,  उसके  संस्कार  हैं   l   वर्ग 'एक्स '   मन  ही  मन  इससे  भयभीत  रहता  है   ,   इसका  ऐसे  बायकाट  करता  है   जैसे  इसने  कोई  भयंकर  अपराध  किया  हो   l  अब  ईमानदारी  और  सच्चाई  से  जीने  वाला   अछूतों  की  श्रेणी  में  आ  गया  है  l 
  इस  समाज  से  ऊपर  एक  प्राकृतिक  व्यवस्था  है    जहाँ  तराजू  से  तोलकर   न्याय  होता  है   l   जिनके  जीवन  की  दिशा  गलत  है   और  जो  ऐसे  गलत  लोगों  का , अन्यायी  का  साथ  देते  हैं  ,  उन्हें  सांसारिक  लाभ  चाहे  जितना  मिल  जाये  लेकिन  तरह - तरह  की  मुसीबतें ,  परेशानी ,  अशांति  उनके  हिस्से  में  आती  है   l   जो  सही  मार्ग  पर  चलते  हैं  , किसी  का  अहित  नहीं  करते  हैं   उनको   परेशानियाँ  एक  हलके  कांटे  की  तरह  छूकर  निकल  जाती  हैं   l  इस  संसार  में  जो  सबसे   अनमोल  है  ' मन  की  शान्ति '  इनके  पास  होती  है   l 
  प्रत्येक  व्यक्ति  के  सामने  ये  दोनों  रास्ते  हैं  ,  व्यक्ति  को  स्वयं  चयन  करना  है  कि  वह   किस  रास्ते  पर  चले  ?    अपने  स्वाभिमान  को  खोकर   संसार  को  खुश  रखे   या     अपनी  आत्मा  को ,  ह्रदय  में  बैठे  ईश्वर  को  प्रसन्न  कर  सिर  उठाकर   चले   l  

Monday, 2 October 2017

संवेदनहीन समाज अशांत और अव्यवस्थित होता है

  आज  की  सबसे  बड़ी  समस्या  है   कि  लोगों  के  ह्रदय  में  संवेदना  समाप्त  हो  चुकी  है  l  अब  लोग   दूसरे की  मृत्यु  का  , दूसरों  के  कष्ट  का  तमाशा  देखते  हैं ,  वीडिओ  बनाते  हैं  l   किसी  की  मदद  नहीं  करते  l  यदि  कोई  मदद  करना  भी  चाहे    तो  दुष्ट  प्रवृति  के  लोग   उस  पीड़ित  व्यक्ति  को  इतना  टार्चर  करते  हैं ,  उस  पर  दबाव  बनाते  हैं  कि  वह  उस  मदद  करने  वाले  के  पास  न  जाये  l   क्योंकि  यदि  पीड़ित  व्यक्ति  किसी  नि:स्वार्थ  सेवा भाव  वाले  के  पास  चले  गए  तो  उसको  यश  मिल  जायेगा ,  यह  स्वार्थी  समाज  से  सहन  नहीं  होगा   कि  किसी  को  यश  मिले  ,  तारीफ  मिले  l  और  सबसे  बढ़कर  भ्रष्टाचार  में  बाधा  उपस्थित  होगी  l
   ऐसे   स्वार्थी  और  संवेदनहीन  समाज  में   आपदाएं , विपदाएं  आती  हैं  ,  लोग  मौखिक  रूप  से  दुःख  मना  कर  ,  अपने  ऐश- आराम  में  मगन  हो  जाते  हैं  l 
         जाके  पैर  न   फटे  बिवाई ,  वो  का  जाने  पीर  पराई  l