Thursday, 14 June 2018

वर्तमान में जीने के साथ भविष्य के लिए सचेत रहना बहुत जरुरी है

    अनेक  विद्वान  जो  बात  कहते  हैं    उसका   प्रत्येक  व्यक्ति  अपने  संस्कार  ,  अपनी  इच्छाओं , आकांक्षाओं  के  अनुसार    अर्थ  निकलता  है  l  जैसे  यह  कहा  जाता  है  कि  वर्तमान   ही  हमारे  सामने  है ,  उसका  उपयोग  करो  l  इसे  अपना  आदर्श  वाक्य  मानकर  अधिकांश  लोग  वर्तमान  में  सारे  सुख - वैभव ,  मौज - मस्ती  में  समय  बिताते  हैं ,  ऐसे  लोगों  का  सोचना  है  कि  कल  किसने  देखा  आज  मौज  कर  लो  l 
    ऐसी  सोच  से  जीवन  परेशानियों  से  घिर  जाता  है  l
  जीवन  में  संतुलन  जरुरी  है  l  वर्तमान   में   सुख - सुविधाएँ   आदि  की  व्यवस्था  के  साथ  भविष्य  के  लिए  पूंजी  संचित  करें ,  जो  कठिन  वक्त  में  हमारे  काम  आये  l
   लेकिन  यह  पूंजी  केवल  धन - सम्पति  ही  न  हो ,  हम  सत्कर्मों  की  पूंजी  भी  जोड़ें    क्योंकि  सत्कर्मों  में  वो  ताकत  है  जिसके  सहारे  हम  बड़ी से बड़ी  मुसीबतों  से  भी  बचकर  सुरक्षित  निकल  आते  हैं  l 

Wednesday, 13 June 2018

जीवन जीने की कला का ज्ञान बहुत जरुरी है

    ' तनाव '  आज  के  समय  की  बहुत  बड़ी  समस्या  बन  गया  है  l  इसका  कारण  यही  है  की  लोग  समस्या   की  ही  चर्चा  करते  हैं  ,  उसका  समाधान  नहीं  ढूंढते   l  समस्या  की  बार - बार  चर्चा  करने  से   वह  परेशानी  बढ़ती  जाती  है   l  यदि  हम  अपना  ध्यान    उस  समस्या  के  समाधान  पर   और  उसके  विभिन्न  विकल्पों  पर  केन्द्रित  करें  तो  तनाव  से  बच  सकते  हैं  l 
  तनाव  से  बचने  का  सबसे  सरल  तरीका  यह  है  कि  जो  कुछ  हमारे  पास  है  ,  उसे  ईश्वर  का  आशीर्वाद  मानकर  खुश  रहें  l  कभी  किसी  से  कोई  उम्मीद  न  करें  l   अपनी  तरक्की  के  लिए  ,  जीवन  में  सुख - भोग  के  साधन  इकट्ठे  करने  के  लिए  कभी  गलत  राह  न  चुने  l  अपना  कार्य  सच्चाई  और  ईमानदारी  से  करें   l  ऐसा  सब  करने  के  लिए  धैर्य  और  ईश्वर  पर  विश्वास  जरुरी  है  l  

Tuesday, 12 June 2018

व्यक्ति अपनी असलियत छुपाता है इसलिए तनाव में जीता है

 कहते  हैं    जिस  व्यक्ति   को   अहंकार  नहीं  है  उसे   दुःखी  करना  असंभव  है    और  जो  अहंकारी  है  उसे  सुखी  करना  असंभव  है  l  
     अहंकार  नहीं  है  - ऐसा  व्यक्ति    हर  हाल  में  खुश  व  तनाव रहित  रहता  है   l  कोई  कुछ  भी  कहे  कहता  रहे  ,  वह  अपनी  दुनिया  में    मस्त  रहता  है   क्योंकि  वह  जानता  है  कि  उसकी  सच्चाई    ईश्वर    जानते  हैं   l
  लेकिन  जो  अहंकारी  है  ,  वह  अपने  इस  दुर्गुण  से  अपने  ही  जीवन  को  नर्क  बना  लेता  है   l  अपने  अहंकार  की  तुष्टि  के  लिए  वह  अपने  ऊपर  शराफत  और  श्रेष्ठ  चरित्र  का  चोला  डाल  लेता  है   l 
  अच्छाई  में  एक  अनोखा  आकर्षण  होता  है   इसलिए  बुरे  से  बुरा  व्यक्ति    भी  समाज  में  यश , प्रसिद्धि  , सम्मान , बड़ा  आदमी   कहलाने  के  लिए    अपने  ऊपर  अच्छाई  का  आवरण  डाल  लेता  है  l   बस  !  यहीं  से  उसके  जीवन  का  कष्ट  शुरू  हो  जाता  है   l   देखने  में  लोगों  को  लगता  है -- देखो  कितना  सुखी  है , कितने  ठाठ - बाट  हैं  ,  कितना  सम्मान  है ,  लेकिन   इसके  पीछे   की  सच्चाई   ऐसा  अहंकारी  स्वयं   जानता    है   कि  अपने  इस  आवरण  को  कटने - फटने  से  बचाने  के  लिए  उसे  कितनो  को  खुश  करना  पड़ता , कितने  लोगों  की  धौंस  सहनी  पड़ती  है ,  न  जाने  कितनों  की  गुलामी  करनी  पड़ती  है ,  अपने  को  सम्मानित कराने  के  लिए  कितनों  को  खरीदना  पड़ता  है  l  यह  सब  बातें  उसके  जीवन  को  तनाव  से  भर  देती  हैं  ,  उसकी  नींद ,  उसका  सुख - चैन  सब  छीन  लेती  हैं  l 
  जो  सीधी  सरल  जिन्दगी  जीते  हैं ,   जिसने  अपनी  कामनाओं - वासनाओं  पर  नियंत्रण  रखा  है  , वे  तनाव रहित  रहते  हैं , जब  भी  वक्त  मिल  जाये  चैन  की  नींद  सो  लेते  हैं  l
  एक  बार  वायसराय  ने  गांधीजी  को  मिलने  को  बुलाया   l  गांधीजी  मिलने  गए  l  वायसराय  ने  कहलवाया   कि   अभी   पंद्रह  मिनट  की  देर  है , आप  बैठें  l  गांधीजी  ने  कहा  कि  मैं  रात  भर  का  जगा  हूँ  ,  पंद्रह  मिनट  सो  लूँगा  तो  सिर  हलका  हो  जायेगा  l  झट  से  उन्होंने  अपनी  चादर  सोफे  पर  लम्बी  की  और  वहीँ  सो  गए   l  और  पंद्रह  मिनट  बाद  जब  वायसराय  आये  तो  वे  उठ   बैठे   l   उन्होंने  कहा -- क्या  बात  है  ! इतनी  गहरी  नींद  आती  है   !  
  यह  निर्णय   प्रत्येक  व्यक्ति   को  स्वयं  लेना  है   की  उसे    दिखावे  का  ,  डबल  फेस  का  तनावपूर्ण  जीवन  जीना  है   या   सीधा - सरल ,  खुली  किताब  सा  जीवन  शांतिपूर्ण  ढंग  से  जीना  है  l 

Monday, 11 June 2018

बच्चे और युवा उपेक्षित हों तो भविष्य अंधकारमय होता है

     आज  संसार  पर  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  है  ,  परिवार हो ,  संस्था  हो ,  समाज  हो  या  विभिन्न  राष्ट्र  हों  ,  जिसमे  थोड़ी  भी  ताकत  है ,  वह  जी - जान  से  इस  प्रयास  में  है  कि  कोई    दूसरा    आगे  न  बढ़  पाए  l  इसके  लिए  नैतिकता  को  दरकिनार  कर  के  सब  प्रयास  किये  जाते  हैं  l 
  अब  आज  का  समय  वीरता  से  आमने - सामने  लड़ने  का  नहीं    रहा  l  अब  कायरता  बढ़  गई  है   l  लोग  इस  तरह   के  हथकंडे  अपनाते  हैं   कि  दूसरे  का  अहित  हो  जाये  और   कानून  तो  बहुत  दूर  है ,  कोई  दोष  भी  न  दे  सके  ,  आज  गिरावट  की  कोई  सीमा  नहीं  रह  गई  है  जैसे -- कोई   का  पारिवारिक  जीवन  सुखी  है ,  तो  ईर्ष्यालु  लोग  ऐसा  हर  संभव  प्रयास  करेंगे   कि  रिश्ते  में  दरार  आ  जाये ,  कोई  सुखी  कैसे  है  ?   इसी  तरह   किसी  परिवार  में  बच्चे - युवा   भविष्य  के  प्रति  जागरूक  हैं , जिम्मेदार  हैं  तो  ईर्ष्यालु  लोग   अपनी  तरक्की  का  प्रयास  नहीं  करेंगे ,  उनका प्रयास  होगा  कि  कैसे  उन  युवाओं  का  अहित  करें ,  उनकी  संगत  बिगाड़  दें ,  नशा  आदि  बुरी  आदतें  लग  जाएँ ,  आलसी  बन  जाएँ ,  हर  तरीके  से  वे  खुशहाली  मिटाने  का  प्रयास  करते  हैं ,  ताकि  तरक्की  न  कर  पायें  l
      यही  बात  राष्ट्र  के  सम्बन्ध  में    लागू   होती  है  l    बच्चे  असुरक्षित  रहें ,  युवाओं  के  सामने  तरह - तरह  के  नशे , विज्ञापन , फ़िल्में , टीवी , और  मोबाइल  के  माध्यम  से  अश्लीलता  परोस  कर   उनका  चरित्र  हनन  कर  दो  और  बिना  मेहनत  का  पैसा  देकर  उन्हें  आलसी  बना  दो  l  ऐसा  होने  पर  परिवार  हो  या  राष्ट्र  विकास  नहीं  होता  और  न  ही  संस्कृति  सुरक्षित  होती  है   l
 अब  बचे  केवल  प्रौढ़  और  वृद्ध  --- अमर  होकर  कोई  नहीं  आया  ,  लेकिन  सोच  यह  है  कि  कोई  सुख  छूट  न  जाये ,  पैसा , भोग - विलासिता  हाथ  से  न  निकल  जाये   l   नई  पीढ़ी को   अच्छी  शिक्षा ,  अच्छे  संस्कार  न   देकर  ,  ऐसे ही  चले  जायेंगे   l  इससे  न  तो  संसार  में  यश  मिलेगा   और  न  ही  ईश्वर  माफ  करेगा   l
 नई  पीढ़ी  का  निर्माण  करने  वाले  भी  देश  में  हैं ,  लेकिन     पतन  का  तूफान  बहुत  घना  है ,  बचाने  वाले  कम  हैं  l   अब  नई  पीढ़ी  को  स्वयं  जागरूक  होने  की  जरुरत  है   l  संसार  में  अच्छाई- बुराई  दोनों  हैं ,  अच्छाई  को  चुने ,  परिश्रमी  बने   l  

Tuesday, 5 June 2018

जो जागते हुए सोने का अभिनय करे उन्हें जगाना बहुत मुश्किल है

 आज  समाज  स्वार्थ  की  नींद  में  सोया  हुआ  है  l   जो  प्रौढ़  और  बुजुर्ग  हैं  उन्हें  लगता  है   कि  जीवन  कब  हाथ  से  फिसल  जाये  जितना  सुख  भोग  सको  भोग  लो   l  काम , क्रोध , लोभ  -- आखिरी  सांस  तक  इसी  के  पीछे   दौड़ते  हैं  l  निष्काम  कर्म  और  त्याग  का  जीवन  जीने  वाले  तो  बहुत  कम  लोग  हैं  l  इसी  तरह  युवा  वर्ग  है   जो  नशा , मौज - मस्ती  को  ही  जवानी  समझता  है  l 
  युवा  वर्ग  के  सामने   समस्या  चाहे बेरोजगारी  की  हो  ,  पर्यावरण  प्रदूषण  की  हो  या   अपने  अस्तित्व  को  बनाये  रखने  की  हो   उसके  समाधान  के  लिए  जागरूकता  और  विवेक  की  जरुरत  है    l 

Sunday, 6 May 2018

कर्महीनता परिवार , समाज और राष्ट्र के पतन का कारण है

    जब  कभी  समाज  पर  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  होता  है   तब  लोग  कर्महीनता   को  ही  कर्मयोग  समझने  लगते  हैं    और  अपने  को  कर्मयोगी  कहने  में  संकोच  नहीं  करते  l  जैसे  एक  भ्रष्टाचारी  है  ,  वह  झूठ  बोलकर ,  दूसरों  का  हक   छीनकर,  हेराफेरी  कर  के  ,  जिस  व्यवसाय  से  उन्हें  समाज  में  सम्मान  है  ,  उसी  व्यवसाय   में  घपला  कर  के   धन  कमाना -- जिस  थाली  में  खा  रहे  हैं  उसी  में  छेद  करना  --- कर्मयोग  नहीं  है   l 
  कर्मयोग  में  उद्देश्य  की  पवित्रता  होनी  चाहिए   l   जब  देश  गुलाम  था  तब   अनेक  महान  नेता   अपने  ओजस्वी  भाषण  से    जनता  के  ह्रदय  में  आग  पैदा  कर  देते  थे  कि  वे  आजादी   के    लिए  मर मिटने  को  तैयार  हो  जाते  थे    l  उनका  पवित्र  उद्देश्य  था ,  संकल्प  था  कि  देश  को  पराधीनता  से   मुक्त  कराना  है ,  स्वतंत्र  होना  है  --- तो  यह  कर्मयोग  था  l 
  लेकिन   यदि    लोग  पैसा  लेकर  ताली  बजाते  हैं ,  निठल्ले  बैठे   कुछ  पैसा  या  सुविधा  लेकर  भाषण  सुनते   हैं ,   अपने  ' आकाओं '  के  कहने  पर   नारेबाजी  और  दंगे - फसाद  करते  हैं  तो  यह  कर्मयोग  नहीं  है   l        समाज  में  ऐसे  लोगों  की  अधिकता  होने  से  ही   जघन्य  अपराध ,  लूटपाट   और  असुरक्षा  बढ़ती  है  l    जरुरी  है  लोग  सकारात्मक  कार्यों  में  व्यस्त  रहे    l  

Saturday, 5 May 2018

लक्ष्यविहीन युवा

   जीवन  में  सकारात्मक  कार्यों  में   व्यस्तता    जरुरी  है  l   यदि  ऐसा नहीं  है   तो   खाली  मन  पर  कोई  भी  कब्ज़ा  कर  लेगा  l   आज  युवाओं  की  यही  स्थिति  है   l   गाइड ( तैयार प्रश्न - उत्तर )  रट  कर  पास  हो  जाते  हैं ,  विषय  का  गहराई  से  ज्ञान  न  होने  के  कारण  रोजगार  की  भी  कोई संभावना  नहीं  है  ,  विभिन्न  योजनाओं  के  अंतर्गत  बिना  मेहनत  के    जिन्दगी  के  कार्यकलाप  पूरे  हो  जाते  हैं   ,  तो  ऐसे  युवाओं  को    धन और  पद  से  शक्तिशाली  लोग  अपनी  कठपुतली  बना  लेते  हैं    और  ऐसे   कार्यों  में  उनका  इस्तेमाल  करते  हैं    जिनका  व्यवहारिक  जीवन  की  समस्याओं  से  कोई  लेना - देना  ही  नहीं  है  l  उनके  नकारात्मक  कार्यों  की  वजह  से  ही  अशान्ति  उत्पन्न  होती  है  l
  अब  जरुरी  है  कि  या  तो  युवा  जागरूक  हों    या  उनका  इस्तेमाल  करने  वालों  का  विवेक  जाग  जाये  क्योंकि  यह  सत्य  है  कि  जो  दूसरों  के  जीवन  को  गलत  दिशा  देता  है   उसे  अपने  जीवन  में  भी  कभी  न कभी ,  कहीं  न  कहीं   हारना  पड़ता  है   और  यह  हार  उसे  सारा  जीवन  कचोटती  है   l