Thursday, 12 October 2017

धन के लालच ने वर्ग भेद और जाति - भेद और ऊँच - नीच के मायने बदल दिए

  समाज  में  एक  वर्ग  ऐसा  तैयार  हो  गया  है   जिसका  उद्देश्य   हर  तरीके  से  धन  कमाना ,  लोगों  पर  प्रभुत्व  जमाना   और  अपनी  झूठी  शान  को  बनाये  रखना  है  l   जो  उनके  इस  ' स्वार्थ '  में  मदद  करते  हैं   उनकी  कठपुतली  बन  कर  रहते  हैं  ,  उन्हें  हर  तरह  का  लाभांश  मिलता  रहता  है  , फिर  उनकी  जाति,  धर्म , वर्ग  कुछ  भी  हो  कोई  फरक  नहीं  पड़ता , पुरुष  हो  या  महिला  हो ,  उनके  इशारों  पर  चले  तो  ठीक  अन्यथा   जीना  मुश्किल  कर  देंगे  l  यह  वर्ग  ' एक्स '  है
  दूसरा  वर्ग   ' वाई ' वह  है  जिसका  विवेक  जाग्रत  है  ,  वह  किसी  के  हाथ  की  कठपुतली  नहीं  बनता , ईमानदारी  से  जीता  है ,  ईमानदारी  उसकी  मजबूरी  नहीं   उसका  स्वभाव  है ,  उसके  संस्कार  हैं   l   वर्ग 'एक्स '   मन  ही  मन  इससे  भयभीत  रहता  है   ,   इसका  ऐसे  बायकाट  करता  है   जैसे  इसने  कोई  भयंकर  अपराध  किया  हो   l  अब  ईमानदारी  और  सच्चाई  से  जीने  वाला   अछूतों  की  श्रेणी  में  आ  गया  है  l 
  इस  समाज  से  ऊपर  एक  प्राकृतिक  व्यवस्था  है    जहाँ  तराजू  से  तोलकर   न्याय  होता  है   l   जिनके  जीवन  की  दिशा  गलत  है   और  जो  ऐसे  गलत  लोगों  का , अन्यायी  का  साथ  देते  हैं  ,  उन्हें  सांसारिक  लाभ  चाहे  जितना  मिल  जाये  लेकिन  तरह - तरह  की  मुसीबतें ,  परेशानी ,  अशांति  उनके  हिस्से  में  आती  है   l   जो  सही  मार्ग  पर  चलते  हैं  , किसी  का  अहित  नहीं  करते  हैं   उनको   परेशानियाँ  एक  हलके  कांटे  की  तरह  छूकर  निकल  जाती  हैं   l  इस  संसार  में  जो  सबसे   अनमोल  है  ' मन  की  शान्ति '  इनके  पास  होती  है   l 
  प्रत्येक  व्यक्ति  के  सामने  ये  दोनों  रास्ते  हैं  ,  व्यक्ति  को  स्वयं  चयन  करना  है  कि  वह   किस  रास्ते  पर  चले  ?    अपने  स्वाभिमान  को  खोकर   संसार  को  खुश  रखे   या     अपनी  आत्मा  को ,  ह्रदय  में  बैठे  ईश्वर  को  प्रसन्न  कर  सिर  उठाकर   चले   l  

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