Saturday, 10 February 2018

अशांति इसलिए है क्योंकि लोग अनाचार के विरुद्ध संगठित नहीं होते

   पिछले  दो  हजार  वर्ष  ऐसे  बीते  हैं  जिनमे  समर्थों  ने   असमर्थों  को  त्रास  देने  में  ,  उन  पर  अत्याचार  करने  में  कोई  कसर  नहीं  छोड़ी  l  जो  लोग  ईश्वर  को  मानते  हैं  उनकी   यह    सोच  होती  है  कि  भगवान  पापियों  को  दंड  देंगे   l   लेकिन  ईश्वर  भी  क्या  करें  ?  जब   सताए  जाने  वाले   चुपचाप  अत्याचार  सहते  हैं  ,  कायरता  और  भीरुता  को  अपनाकर   अनीति  से  टकराने  के  लिए  संगठित  नहीं  होते  l   अपनी  कमजोरियों  के  कारण  अनाचारी  को  क्षमा  कर  अनीति   को  बढ़ावा  देते  हैं  l   मानवीय  गरिमा  के  विरुद्ध  ऐसे  आचरण  से  प्रकृति  भी     रुष्ट  हो  जाती  है   l
  अच्छाई  और  सच्चाई  के  मार्ग  पर  एक  कदम  भी  बढ़ाओ   तो  दैवी  शक्तियां  मदद  को  तत्पर  रहती  हैं  '  लेकिन  एक  कदम  तो  बढ़ाना  ही  होगा   l 

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