Friday, 29 March 2019

धन और पद के लालच से मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है

 जब  व्यक्ति  का  लोभ  व  लालच   मर्यादा  की  सीमा  रेखा  पार  कर  जाता है   तब  ऐसा  व्यक्ति  कायर  व  संवेदनहीन  हो  जाता  है   और  अपने  साथ  ऐसे  कायर व  संवेदनहीन  लोगों  की  भीड़  इकट्ठी  कर  लेता  है   और  इनके  पास सिर्फ  एक  ही  काम  होता  है   कि  हर  उचित - अनुचित  तरीके  से   योग्य  व्यक्ति  को  आगे  मत  आने  दो ,  अन्यथा  उनकी   अयोग्यता   का  पर्दाफाश  हो  जायेगा  l  गलत  तरीके  से  जो  साजो - सामान ,  वैभव  इकट्ठा  किया  है , उन्हें    उसका  भय  सताता  है  l  इस कारण  ऐसे  कायर  व्यक्ति  अपनी  योग्यता  नहीं  बढ़ाते ,   अपनी  सारी  शक्ति  योग्य  व  कुशल  व्यक्ति  को  पीछे  धकेलने  में  लगा  देते  हैं  l
  अँधेरा  कितना  भी  घना  हो ,  आखिर  सूर्योदय  तो  होता  ही  है  l
  गुलामी  के  दिनों  में  अंग्रेजों  ने   भारतीयों  को  बहुत  दीन- हीन  व  कमजोर  समझा ,  बहुत  अत्याचार  किये   l  उन  विपरीत  परिस्थितियों  में  भी  अनेक  महान  व्यक्ति  हुए  जिनके  प्रयासों  से  देश  को  आजादी  मिली  l  बुद्धिमानी  इसी  में  है   कि  दूसरों  को  धक्का  देकर  आगे  बढ़ने  के   बजाय  अपनी  योग्यता   बढ़ाओ  l 

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