Wednesday, 20 March 2019

स्वविवेक जरुरी है

   व्यक्ति  कितना  भी  पढ़ - लिख  जाये ,  उच्च  पद  पर  पहुँच  जाये   , लेकिन  यदि  वह  स्वविवेक  से  काम  नहीं  लेता   तो  उसकी  शिक्षा  व्यर्थ  है  l   अधिकांश  लोग  कान  के  कच्चे  होते  हैं  ,  बिना  देखे ,  बिना  सोचे - समझे  दूसरों  की  बात  का  विश्वास  कर  लेते  हैं  l   अधिकांश  लोग  धन  का  लालच ,  अपनी  असीमित  कामना , वासना  के  कारण  अपना  जीवन  कठपुतली  बन  कर  ही  गुजार  देते  हैं   l  समाज  में  जाति,   धर्म  आदि  को  लेकर  झगड़े, दंगे   मनुष्य  की  इसी  कमजोरी  के  कारण  होते  हैं  l 
 अधिकांश  संस्थाओं  में   अधिकारियों  से मन - मुटाव ,  विभागीय झगड़े  इसी  कारण    उत्पन्न  होते हैं   l  एक  पक्ष   , दूसरे  पक्ष  से    उन  गलतियों  की  वजह  से   चिढ़ा  हुआ  है ,  जो   दूसरे  पक्ष  ने  कभी  की  ही  नहीं  l  स्वविवेक  न  होने  के  कारण  ही  आज  मनुष्य  ' बिकाऊ '  है  l   गरीबी , भुखमरी , दिवालिया  आदि  कारणों  से   कोई  व्यक्ति   अपना  घर - परिवार  बेच  दे ,  स्वयं  को  भी  बेच  दे  ,  तो  यह  उसकी  मज़बूरी  है   लेकिन   हर  तरह  से  संपन्न  लोग जब   अपना  स्वाभिमान  गिरवी  रखकर  , किसी  के  हाथ  की कठपुतली  बन  जाते  हैं  ,  मानसिक  गुलाम  बन  जाते  हैं   और  ऐसा  कर  के  बहुत  खुश  भी  होते  हैं ---- तो  यह  उनकी  दुर्बुद्धि  है  l
  आज  की  सबसे बड़ी  जरुरत  है  कि  बच्चों  को  शिक्षा  के  साथ  स्वाभिमान  से  जीना  सिखाया  जाये  l  भौतिक  प्रगति  ही  विकास का  मानदंड  नहीं  है  l  परिवार   और  देश  का  उत्थान   उसके  सदस्यों  के  श्रेष्ठ  चरित्र  से  होता  है   l    

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