Monday, 3 June 2019

विचारों का परिष्कार जरुरी है

विभिन्न  धर्मों ,  जातियों  और  समाज  में  युगों  से  महिलाओं  पर  अत्याचार  किये  गए   l  अब  महिला   सशक्तिकरण  के  नाम  पर  देश - दुनिया  में  बहुत  काम  हो  रहे  हैं   लेकिन  जब  तक  पुरुष  वर्ग  की  मानसिकता  नहीं  बदलती  तब  तक  इन  विभिन्न  प्रयासों  से  कोई  सच्चा    लाभ  नहीं है  l  देखने  में  तो   यह  स्पष्ट   है  कि    महिलाएं  उच्च  व  महत्वपूर्ण  पदों  पर  हैं    लेकिन  सशक्त  वे  तभी  कहलाएंगी  जब  वे  अपने  विवेक  और  अपने  स्वयं  के  ज्ञान  व  समझ  से  निर्णय  लेंगी   l  दुर्भाग्य  यह  है  कि   जो  महिलाएं   पुरुषों  के  स्वार्थ , भ्रष्टाचार  आदि  गलत  कार्यों  में  सहयोग  न  दें   उन्हें   उपेक्षित  व  अपमानित किया  जाता  है   l  जो  अपने  विवेक  से  कार्य  करे ,  पुरुष  प्रधानता  को, सामंती  व्यवस्था  को    चुनौती  दे   उन्हें  वृहद  स्तर  पर  अपमानित करने  व  '  चिढ़ाने  '  जैसा  तुच्छ  कार्य  किया  जाता  है  l   यह  सशक्तिकरण  नहीं  है  l  समस्या  विकट  तब  और  हो  जाती   है  जब  महिलाएं  ही  अपनी  किन्ही  कमजोरियों  के  कारण   किसी  महिला  को  उत्पीड़ित  करने  के  लिए  ,  उसके  विरुद्ध  षड्यंत्र  रचने  के  लिए   पुरुषों  का  साथ  देने  लगती  हैं  l   सामाजिक  स्थिति  चाहे  वह  महिलाओं  की   हो  या  दलितों  की ,  उसमे  सुधार  तभी  संभव  है   जब  लोगों  के  ह्रदय  में  संवेदना  होगी  , मानवता  होगी ,  उनके  विचार  परिष्कृत  होंगे   l  

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