Thursday, 6 September 2018

' जियो और जीने दो ' के सिद्धांत को जब लोग स्वीकार करेंगे , तभी समाज में शांति होगी

 आज  समाज  में  ऐसे  लोगों  की  अधिकता  है   जो  दूसरों  को  आगे  नहीं  बढ़ने  देना  चाहते   l  ऐसे  लोग  अपनी  योग्यता  बढ़ाने  का  प्रयास  नहीं  करते  ,  और  अपनी  सारी   ऊर्जा  दूसरों  को  नीचा  दिखाने,  उन  पर  अपनी  हुकूमत   चलाने  में  खर्च  कर  देते  हैं  l   ये  एक  विशेष  प्रकार  की  मानसिकता  के  लोग  हैं  ,  इन्हें  किसी  जाति  के  दायरे  में  नहीं  बाँधा  जा  सकता  क्योंकि   ऐसे  व्यक्ति   किसी  के  सगे  नहीं  होते  l  ईर्ष्या - द्वेष  इतना  होता  है  कि  अपने  ही  लोगों  का  हक  छीनने,  उनकी  तरक्की  के  रास्ते  में  बाधा  डालने  के  लिए   वे  गैर  का  सहारा  लेते  हैं   l  जब  समाज  में  नैतिक  गिरावट  होती  है  ,  कायरता बढ़  जाती  है  तब  अच्छे - बुरे की  पहचान  कठिन  हो  जाती  है  l  वास्तव  में  अपराधी  कौन  है ,  निर्दोष  कौन  है ,जानना  कठिन  है  l  विचारों  में  परिवर्तन  हो  , संवेदना  विकसित  हो ,  इसी  की आवश्यकता  है  l 

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