Sunday, 11 March 2018

नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से प्रेरणा ग्रहण करती है

  आज  की  सबसे  बड़ी  समस्या  यह  है  कि  युवाओं  को  मार्गदर्शन  देने  वाला  कोई  नहीं  है   l  जो  बड़ी  उम्र  के  हैं  वे  धन  और  पद  के  लालच  में   बेईमानी  और  भ्रष्टाचार  में  गहरे  डूबे  हुए  हैं   l  ये  लोग  अपने  स्वार्थ  के  लिए  नई  पीढ़ी  को  भी  इस्तेमाल  करते  हैं  l   आयु  बढ़ने  के  साथ  त्याग  और वैराग्य  का  भाव  बढ़ना  चाहिए ,  वह  कहीं  नहीं  दिखाई  देता , कामना , वासना  और  तृष्णा  बढ़ती  ही  जाती  है  l  व्यक्ति  अपनी  आखिरी  सांस  तक  इन्ही  की  पूर्ति  में  लगा  रहता  है  l  अच्छे  और  विवेकशील  लोग  भी    बहुत  हैं  लेकिन   अंधकार  इतना  घना  है  ,  दुर्बुद्धि  का  ऐसा  प्रकोप  है  कि  अच्छाई    इस  अंधकार  को  चीर  कर  बाहर  नहीं  आ  रही  l 
  हमें  आशावान  होना  चाहिए   और  ईश्वर  से  सद्बुद्धि  के  लिए  प्रार्थना  करनी  चाहिए  l  अंधकार  कितना  भी  घना   हो  ,  सुबह  अवश्य  होगी  l 

Thursday, 8 March 2018

नारी सशक्तिकरण के लिए समाज को संवेदनशील होना पड़ेगा

 संवेदनहीन  होने  के  कारण   ही  मनुष्य  के  भीतर  छुपा  दानव  जाग्रत  हो  जाता  है  और  भ्रूण हत्या ,  दुष्कर्म ,  हत्या   जैसी  अमानवीय  घटनाएँ  होती  हैं  l  पुरुष  का  अहंकार ,  उसकी  निर्दयता ,  क्रूरता  तो  नारी  उत्पीड़न  का  बहुत  बड़ा  कारण  है  लेकिन   ईर्ष्या, द्वेष , लालच , वासना  आदि  अनेक  मानवीय  कमजोरियों  के  कारण  अनेक  महिलाएं  ही    किसी  अन्य   महिला  को  उत्पीड़ित  करने  में  पुरुषों  का  सहयोग  करती  हैं  और  वर्चस्व  के  लिए  स्वयं  भी  दूसरी  महिला  को  उत्पीड़ित  करती  हैं    जैसे  दहेज  आदि  अनेक    कारणों    से   परिवार  में  ही  नारी  के  प्रति  हिंसा  होती  है ,  उसे  सताया  जाता  है  l
      हमारी  सोच  सकारात्मक  हो  ,  नारी  और  पुरुष  दोनों  ही  एक - दूसरे  के  महत्व  को  समझें ,  अपने  ह्रदय  में  सद्गुणों  को  स्थान  दें  ,  तभी  एक  स्वस्थ  समाज  का  निर्माण  हो  सकता  है  l   

Friday, 2 March 2018

आज मनुष्य लाशों पर राज करना चाहता है

' कायरता   इस  संसार  का  सबसे  बड़ा  कलंक  है  l   लोगों  पर  अहंकार  इस  कदर  हावी  है  कि  ऐसा  प्रत्येक  व्यक्ति  जिसके  पास  थोड़ी  भी  शक्ति  है -- चाहे  वह  पद  की  हो  या  धन  की ,  वह  ऐसे  लोगों  को  पसंद  करता  है  जो  उसके  इशारों  पर  उठे - बैठें ,  दिन  को  वो  रात  कहे  तो  उसकी  हाँ  में  हाँ  मिलाये  l 
  आज  लोगों  का  विवेक  सो  गया  है  ,  तुरत  लाभ  के  लिए  ,  लालच वश  वे  अपने  दिमाग  को  ताला  लगा  देते  हैं  और  दूसरे  के  हाथों  की  कठपुतली / पुतला   बन  जाते  हैं   l   ऐसे  ही  लोग  चलती - फिरती  लाश  होते  हैं  l  ऐसे  ही  लोगों  की  अब  भरमार  है ,  अपने  स्वाभिमान  को  मिटाकर  समर्थों  के  अहंकार  को  बढ़ावा  देते  हैं   l   जो   कठपुतली / पुतला  न  बने   उसका  बायकाट  करने  के  लिए  सारे  अहंकारी  एक  हो  जाते  हैं  ,  नैतिकता  को  ताक  पर  रखकर  हर  संभव  प्रयास  करते  हैं  l
  इस  समस्या  का  एक  ही  हल  है --- या  तो  किसी  तरह  लोगों  का  स्वाभिमान  जाग  जाये  ,  या  फिर  जिनके  भीतर  विवेक  हैं ,    स्वाभिमान  है ,  अपनी  मेहनत,  अपनी  योग्यता  की  दम  पर  जीना  चाहते  हैं  वे  संगठित  होकर  मजबूत  फौलाद  बन  जाएँ   l  

Thursday, 1 March 2018

मनुष्य इतना निर्दयी, संवेदन हीन क्यों हो जाता है ?

  मनुष्य   के   भीतर  देव  और  दानव  दोनों  है   l   विज्ञान  ने  मनुष्य  को  संवेदन हीन  बना  दिया  है  , उसके  भीतर  का  राक्षस  जाग  गया  है  l   धन  और  पद  व्यक्ति  को  अहंकारी, दम्भी  बना  देता  है  और  वह  अपनी  शक्ति  का  दुरूपयोग  करने  लगता  है   l  अपने  अहंकार   की   पूर्ति  के  लिए  लोगों  पर  अत्याचार  करते  हैं  l  हर  क्रिया  की  प्रतिक्रिया  होती  है  l  गरीबी , भूख , बेरोजगारी  इसके  साथ  उपेक्षा  और  अपमान  ---- यह  सब  परिस्थितियां  व्यक्ति  को  अपराध  की  ओर  धकेलती  हैं  , व्यक्ति  का  तेजी  से  पतन  होने  लगता  है  l   अपराधी  व्यक्ति  कायर  होता  है   l    छोटे - छोटे  अबोध  बच्चों  पर  जुल्म  करना  कायरता  और  राक्षसी  प्रवृति  है   l  समस्या  की  गहराई  में  जो  मूल  कारण  हैं  उनका  समाधान  करने  से  ही  सुधार  संभव  है  l 

Thursday, 22 February 2018

लोग दूसरों की जड़ काटने में लगे हैं

  आज  समाज  में  इतनी  अशांति ,  इतना  आक्रोश  है  उसका  कारण  यही  है  कि  आज  व्यक्ति   मेहनत  और  लगन  से  आगे  बढ़ना  नहीं  चाहता ,  वह  अपनी  तरक्की का  कोई  प्रयास  नहीं  करता  l  ऐसे  लोगों  का  सारा  प्रयास  यही  होता  है  कि  कैसे  किसी  को  अपमानित  करें ,  उपेक्षित  करें ,  उसकी  तरक्की  में  रोड़े   अटकायें  और  स्वयं  को  उससे  सुपर  साबित.    करें ------ ऐसे प्रयासों  के  लिए  तरह - तरह  के ओछे   हथकंडे  अपनाये   जाते  हैं  जिससे  समाज  में  अशांति  होती  है  l  

Saturday, 17 February 2018

अशांति का एक बड़ा कारण है ----- कर्तव्यपालन में ईमानदारी न होना

 केवल  व्यक्ति  ही  नहीं  ,  समाज  व  राष्ट्र  का  भी  दुर्भाग्य  होता  है   l  बुद्धि  ऐसी  भ्रष्ट  हो  जाती  है  कि  गलत  काम  करने  वाले ,  अपराधी  और  मर्यादाहीन  आचरण  करने  वाले   समाज  में  बहुत  शान  से  रहते  हैं ,  डर   से  ही  सही  उनका  समाज  में  आदर  होता  है  ,  इसके  विपरीत  सच्चाई  व  ईमानदारी  से  काम  करने  वालों  को  उपेक्षित  किया  जाता  है  l   उन्हें  हर  तरह  से  तंग  किया  जाता  है  l   अच्छाई को  संगठित  होना  पड़ेगा   l 

Saturday, 10 February 2018

अशांति इसलिए है क्योंकि लोग अनाचार के विरुद्ध संगठित नहीं होते

   पिछले  दो  हजार  वर्ष  ऐसे  बीते  हैं  जिनमे  समर्थों  ने   असमर्थों  को  त्रास  देने  में  ,  उन  पर  अत्याचार  करने  में  कोई  कसर  नहीं  छोड़ी  l  जो  लोग  ईश्वर  को  मानते  हैं  उनकी   यह    सोच  होती  है  कि  भगवान  पापियों  को  दंड  देंगे   l   लेकिन  ईश्वर  भी  क्या  करें  ?  जब   सताए  जाने  वाले   चुपचाप  अत्याचार  सहते  हैं  ,  कायरता  और  भीरुता  को  अपनाकर   अनीति  से  टकराने  के  लिए  संगठित  नहीं  होते  l   अपनी  कमजोरियों  के  कारण  अनाचारी  को  क्षमा  कर  अनीति   को  बढ़ावा  देते  हैं  l   मानवीय  गरिमा  के  विरुद्ध  ऐसे  आचरण  से  प्रकृति  भी     रुष्ट  हो  जाती  है   l
  अच्छाई  और  सच्चाई  के  मार्ग  पर  एक  कदम  भी  बढ़ाओ   तो  दैवी  शक्तियां  मदद  को  तत्पर  रहती  हैं  '  लेकिन  एक  कदम  तो  बढ़ाना  ही  होगा   l