Friday, 2 March 2018

आज मनुष्य लाशों पर राज करना चाहता है

' कायरता   इस  संसार  का  सबसे  बड़ा  कलंक  है  l   लोगों  पर  अहंकार  इस  कदर  हावी  है  कि  ऐसा  प्रत्येक  व्यक्ति  जिसके  पास  थोड़ी  भी  शक्ति  है -- चाहे  वह  पद  की  हो  या  धन  की ,  वह  ऐसे  लोगों  को  पसंद  करता  है  जो  उसके  इशारों  पर  उठे - बैठें ,  दिन  को  वो  रात  कहे  तो  उसकी  हाँ  में  हाँ  मिलाये  l 
  आज  लोगों  का  विवेक  सो  गया  है  ,  तुरत  लाभ  के  लिए  ,  लालच वश  वे  अपने  दिमाग  को  ताला  लगा  देते  हैं  और  दूसरे  के  हाथों  की  कठपुतली / पुतला   बन  जाते  हैं   l   ऐसे  ही  लोग  चलती - फिरती  लाश  होते  हैं  l  ऐसे  ही  लोगों  की  अब  भरमार  है ,  अपने  स्वाभिमान  को  मिटाकर  समर्थों  के  अहंकार  को  बढ़ावा  देते  हैं   l   जो   कठपुतली / पुतला  न  बने   उसका  बायकाट  करने  के  लिए  सारे  अहंकारी  एक  हो  जाते  हैं  ,  नैतिकता  को  ताक  पर  रखकर  हर  संभव  प्रयास  करते  हैं  l
  इस  समस्या  का  एक  ही  हल  है --- या  तो  किसी  तरह  लोगों  का  स्वाभिमान  जाग  जाये  ,  या  फिर  जिनके  भीतर  विवेक  हैं ,    स्वाभिमान  है ,  अपनी  मेहनत,  अपनी  योग्यता  की  दम  पर  जीना  चाहते  हैं  वे  संगठित  होकर  मजबूत  फौलाद  बन  जाएँ   l  

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