Tuesday, 17 April 2018

चरित्रहीनता ही समाज में अशांति और संस्कृति के पतन का कारण है

किसी  भी  देश  पर  चाहे  कितने  ही  विदेशी  आक्रमण  हों ,  लेकिन  यदि  देश  के  लोगों  का  चरित्र  श्रेष्ठ  है  ,  उनमे  नैतिक  बल  है  ,  तभी  वह  संस्कृति  जीवित  रहती  है    और  ऐसा  न  होने  पर  अंत  सुनिश्चित  है  l    हमारे  देश  में  अनेक  महान  धर्म - सुधारक  हुए --- कबीर ,  नानक ,  गुरु गोविन्दसिंह , रामकृष्ण परमहंस  ,  स्वामी  विवेकानन्द,   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य ,  आदि  ने  समाज  को  ऊँचा  उठाने  का ,  धर्म  में  आई  विभिन्न  बुराइयों  को  दूर  करने  का  प्रयास  किया   l  ऐसे  महान  विभूतियों  के  कारण  ही  इतने  विदेशी  आक्रमण  और  गुलामी  के  बावजूद  भी  भारतीय  संस्कृति  जीवित  रही  l 
  धर्म  के  नाम  पर  आज  भी  बड़े - बड़े  लोग  हैं  ,  लेकिन  सामाजिक  समस्याओं  पर ,  समाज  में  आई  विकृतियों  पर  चुप  रहते  हैं  ,  धर्म  के   सच्चे  स्वरुप  को  सामान्य  जनता  को  नहीं  बताते   l  जब  युवा  पीढ़ी  जाग्रत  होगी   ,  आधुनिक  वैज्ञानिक  विधियों   का    प्रयोग  समाज  के  सभी  क्षेत्रों  की  सच्चाई  जानने    के  लिए  करेगी    तभी  वास्तविक  तथ्यों  के  आधार  पर    पता  चलेगा    की  समाज  में  इतनी  अशांति  का  कारण  क्या  है  ,  विकृतियों  को  कैसे  दूर  किया  जा  सकता  है    l 
  संस्कृति  की  रक्षा  के  लिए  जो  आगे  आयेंगे  वही  इतिहास  में  स्वर्णाक्षरों  में  अपना  नाम  अंकित  करा  पाएंगे   l  

Sunday, 15 April 2018

बच्चे की उत्सुकता ---- एक कहानी

 एक  बच्चा  बहुत  गरीब  ,  अपने  पिता  के  साथ  झोपड़ी  में  रहता  था  l   गरीबी  और  मजबूरीवश  माँ  मर  गई  या  मार  दी  गई  ,  कोई  नहीं   जानता    l  बच्चा  अपने  पिता  से  जिद्द  करता   बड़े - बड़े  महल  देखने  की   l   बेचारा  पिता  !  महल  कैसे  दिखाता  l   उसे  एक  युक्ति  सूझी  ,  वह  अपने  बच्चे  को   भगवान  के  महल ----  मंदिर , मस्जिद , गुरुद्वारा ,  चर्च  सब  दिखाने  ले  गया  l  बच्चा  आँख  फाड़े  देखता  रहा ---
 ' भगवान  तेरे  एक  को  इतना  बड़ा  मकान  "    बच्चा  रास्ते  भर  पूछता  रहा  -- इतने  सारे कमरे  है ,  कौन  रहता  है ,  क्या  होता  है   ?
  पिता  चुप  था ,  उसकी  आँखों  में  आँसू  थे   l   क्योंकि  वह  तो  उसे  शुरू  से  यही  समझाता  रहा  था  कि  महलों  से  दूर  रहना ,   ईश्वर  को  पाना  है  तो  ह्रदय  को  पवित्र  बनाओ   l  

Friday, 13 April 2018

बच्चे ही देश का भविष्य हैं

  बच्चों  तुम   तकदीर  हो  कल  के  हिंदुस्तान  की  ----- ?
जब  बच्चे  ही  सुरक्षित  नहीं  हैं ,  भयभीत  हैं  तो  कल  कैसा  होगा  ?  इसकी  कल्पना  की  जा  सकती  है  l 
 अपराध , झूठ  और  दिखावे  की  जिन्दगी  जीते - जीते  व्यक्ति  अन्दर  से  इतना  कमजोर  हो  गया  है  कि  वह   अपने  बराबर  वालों  से  तो  लड़  ही  नहीं  सकता  इसलिए  बच्चों  पर  जुल्म  करता   है  l   

Thursday, 29 March 2018

अति महत्वाकांक्षा अनेक समस्याओं का कारण है

     आज  की  सबसे  बड़ी  समस्या  यह  है  कि   जो  धन -संपन्न  हैं , उच्च  पदों  पर  हैं  उन्होंने  इस  स्थिति  को  अपनी  बपौती  समझ  लिया  है  l  अपनी  सन्तान  को   चाहे  वह  अयोग्य  हो  , उसे  वे   ऊँचे  पद  पर ---डाक्टर , इंजीनियर, उच्च  अधिकारी  देखना  चाहते  हैं  l  ऐसी  सन्तान  जो   अयोग्य  है  और  परिश्रम  भी  नहीं  करना  चाहती ,  उसके  लिए   अनेक  धनाढ्य  माता - पिता   दस - बीस  लाख और  उससे  भी  ज्यादा  धन  खर्च  कर  के  , उसे  विभिन्न  परीक्षाओं  में  पास  कराना  चाहते  हैं  और   इस  कार्य  में  सक्रिय  विभिन्न  गैंग  से  मिलकर  ऐसे  घोटालों   को  अंजाम  देते  हैं   l
  कुछ  लोगों  की  गलतियों   का  दुष्परिणाम    अनेक   योग्य  और  परिश्रमी  छात्र - छात्राओं  को  भुगतना  पड़ता  है  ,  ठीक  उसी  तरह  जैसे  बाढ़ , तूफान  अच्छा - बुरा  नहीं  देखता  सबको  बहा  ले  जाता  है  l 
  जब  माता - पिता    ईमानदार  और  कर्तव्यनिष्ठ  होंगे  तभी  वे   नई  पीढ़ी  को  संवार  सकेंगे  अन्यथा  प्रकृति  न्याय  करेगी  l 

Friday, 23 March 2018

निर्भय होकर जीना जरुरी है

   किसी  भी  समाज  में  अन्याय , अत्याचार , शोषण , उत्पीड़न  इसलिए  बढ़ता  है   क्योंकि  लोग  उसे  चुपचाप  सहन  करते  हैं  l   एक  गरीब , मजबूर  या  स्वयं  ही  अपनी  मुसीबतों  में  फँसा  हुआ  व्यक्ति  ऐसे  अत्याचार  के  विरुद्ध  खड़ा  न  हो  पाए , यह  एक  अलग  बात  है   लेकिन  बहुसंख्यक  ऐसे  हैं  जो  अति  का  लालच  , महत्वाकांक्षा  और  स्वार्थ   के  कारण  अत्याचारियों  का  साथ  देते  हैं  ,  अन्याय  होता  हुआ  देखते  हैं  और  चुप  रहते  हैं  l  अनेक  समर्थ  व्यक्ति   जो  अन्याय  को  रोक  सकते  हैं  , वे  सिर्फ  इसलिए  चुप  रहते  हैं  ताकि  उनकी ' दुकान '  चलती  रहे   l  सोचते  हैं -- ' हमें  क्या  करना , जो  हो  सो  हो  '  l  ऐसे  असंवेदनशील  लोगों  की  वजह  से  छोटे - छोटे  नेता , जो  बड़े  नेताओं  के  संरक्षण  में  पल  रहे  हैं , वे  भी  अत्याचार , अन्याय  करने  लगते  हैं  l
  शिकायत  करें  भी  तो  किससे  करें  ?  इसका  एक  ही  हल  है --- निर्भय  होकर  जियें ,  जब  तक  जीना  है  शान  से  जिएं l   इसमें  एक  बात  ध्यान  रखनी  होगी  कि  हम  किसी  का  अहित  न  करें  l  केवल  ईश्वर  से  डरें,  कोई  गलत  काम  न  करें  l  तभी  स्वाभिमान  से , निर्भय  होकर  जी  सकते  हैं  l  

Thursday, 22 March 2018

अशान्ति का कारण है --- अनुशासनहीनता

  आज  के  समय  में  युवकों  को   सही  दिशा  देने  वाला  कोई  नहीं  है  l  अनेक  लोग  युवाओं  को   सही  दिशा  देने  के  लिए  प्रयत्नशील  हैं  लेकिन  भ्रष्टाचार  और  ' नेतागिरी '  इतनी  है  कि  उसने  अच्छाई  को  ढक  दिया  है  l  सर्वप्रथम   बच्चे  अपने  परिवार  से  सीखते  है   l  यदि  परिवार  में  माता -पिता , भाई  आदि  परिवार  के  सदस्य  आदि  स्वार्थ , बेईमानी , झूठ , कर्तव्यहीनता , शेखी  दिखाना ,  नशा ,  अहंकार , भ्रष्टाचार  जैसे  दुर्गुणों  से  ग्रस्त  हैं   तो  उन  परिवारों  के  बच्चे , युवा  सब  ऐसी  ही  गलत  राह  पर  चलते  हैं  l   इस  पर  नेताओं  का  संरक्षण , दंड  का  भय  न  होना ,  रिश्वत  देकर ' अपराधी '  कहलाने  से  भी  बच  जाना  , पैसों  की  दम  पर  स्वयं  को  निर्दोष  साबित  करना ---- ये  सब  बातें  उद्दंडता  को  और  बढ़ाती  हैं  l  यदि  कोई  युवक  या  नाबालिग  कोई  अपराध  करता  है  तो  यह  निश्चित  है  कि  उसके  परिवार  के  सदस्य , पिता  आदि  अपराध  से  जुड़े  हैं  l  बबूल  के  पेड़  में  आम  नहीं  लगता  l  बड़े  शहरों  में  तो  लोग  कम  से  कम  यातायात  के  नियमों  का  पालन  कर  ही  लेते  हैं  लेकिन  छोटे  शहरों  में  उद्दंडता  और  लापरवाही  इतनी  है  कि   यातायात  के  नियमों  को  भी  ताक  पर  रखकर  लोग  गाड़ी  दौड़ाते  हैं  l  भगवान  भरोसे  जो  कोई  सुरक्षित  घर  आ  जाये  l 
  आज  धर्म  के  नाम  पर  हर  धर्म  के  लोग  अपनी  शक्ति - प्रदर्शन  करते  हैं  l  ईश्वरीय  न्याय  का  आज  किसी  को  डर  नहीं  है  , ओछे  हथकंडों  से  लोग  अपने  को  धार्मिक ,  ईश्वर  भक्त  दिखाना  चाहते  हैं   l  अपनी  बुराइयों  को,   दुष्प्रवृतियो  को  दूर  कर  अपने  ह्रदय  के  भगवान  को  जगाना  नहीं  चाहते  l  

Wednesday, 14 March 2018

जागरूकता की कमी अनेक समस्याओं का कारण है

जीवन में  अधिकांश  समस्याएं  इसलिए  उत्पन्न  होती  हैं  क्योंकि  हम  जागरूक  नहीं  है  l  केवल  प्रश्न - उत्तर   रट  लेने  से , परीक्षा  पास  कर  लेने  से  जागरूकता  नहीं  आती  l  श्रेष्ठ  साहित्य  का  अध्ययन  करना , महापुरुषों  के  प्रेरक - प्रसंग  पढना , शिक्षाप्रद  कहानियां  पढना अर्थात  स्वाध्याय  से  समझ  विकसित  होती  है  l  इस  समझ  की  कमी  की  वजह  से  ही  आज  का  युवा  वर्ग  परेशान  है  l 
 शोषण  व  अत्याचार  करने  वाले   इतने  चालाक,  इतने  होशियार  होते  हैं  कि  एक  सामान्य  बुद्धि  का  व्यक्ति  समझ  ही  नहीं  पाता  कि  उसका  शोषण  हो  रहा  है ,  उसका  हक़  छीना  जा  रहा  है  l
    आज  की  समस्याएं  ताकत  से  नहीं ,  बुद्धि  और  विवेक  से  सुलझ  सकती  हैं  l एक  ओर    युवा  वर्ग  यदि  रोजगार  के  लिए  परेशान  है  तो  दूसरी  ओर  अनेक  ऐसी  संस्थाएं  हैं  जो  रिटायर  हुए  लोगों  को  जो 67-68 वर्ष  से  भी  अधिक  आयु  के  हैं ,  उन्हें  रोजगार  देती  हैं  l  उन्हें  दो तरफ़ा लाभ  हो जाता  है -- पेंशन  भी  और  वेतन  भी  लेकिन  युवा  वर्ग  जागरूकता  और  सही  दिशा  के  अभाव  में  बेरोजगार  रह  जाता  है  l  युवाओं  को  -- चाहे  वे  युवक  हों  या  युवतियां -- अपने  सपनो  की  दुनिया  से  बाहर  आना  होगा l  जागरूक  होना  होगा   l  ज्ञान  और  समझदारी  से  ही  समस्याएं  हल  होती  हैं  l