Friday, 23 March 2018

निर्भय होकर जीना जरुरी है

   किसी  भी  समाज  में  अन्याय , अत्याचार , शोषण , उत्पीड़न  इसलिए  बढ़ता  है   क्योंकि  लोग  उसे  चुपचाप  सहन  करते  हैं  l   एक  गरीब , मजबूर  या  स्वयं  ही  अपनी  मुसीबतों  में  फँसा  हुआ  व्यक्ति  ऐसे  अत्याचार  के  विरुद्ध  खड़ा  न  हो  पाए , यह  एक  अलग  बात  है   लेकिन  बहुसंख्यक  ऐसे  हैं  जो  अति  का  लालच  , महत्वाकांक्षा  और  स्वार्थ   के  कारण  अत्याचारियों  का  साथ  देते  हैं  ,  अन्याय  होता  हुआ  देखते  हैं  और  चुप  रहते  हैं  l  अनेक  समर्थ  व्यक्ति   जो  अन्याय  को  रोक  सकते  हैं  , वे  सिर्फ  इसलिए  चुप  रहते  हैं  ताकि  उनकी ' दुकान '  चलती  रहे   l  सोचते  हैं -- ' हमें  क्या  करना , जो  हो  सो  हो  '  l  ऐसे  असंवेदनशील  लोगों  की  वजह  से  छोटे - छोटे  नेता , जो  बड़े  नेताओं  के  संरक्षण  में  पल  रहे  हैं , वे  भी  अत्याचार , अन्याय  करने  लगते  हैं  l
  शिकायत  करें  भी  तो  किससे  करें  ?  इसका  एक  ही  हल  है --- निर्भय  होकर  जियें ,  जब  तक  जीना  है  शान  से  जिएं l   इसमें  एक  बात  ध्यान  रखनी  होगी  कि  हम  किसी  का  अहित  न  करें  l  केवल  ईश्वर  से  डरें,  कोई  गलत  काम  न  करें  l  तभी  स्वाभिमान  से , निर्भय  होकर  जी  सकते  हैं  l  

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