Saturday, 21 April 2018

अपने धन और अपनी ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करें

     आज   समाज  में  धर्म  के  नाम  पर  पाखंड  बहुत  बढ़  गया  है   l  संसार  का  कोई  भी   धर्म  हो   उसमे   अब  धर्म  ने  व्यवसाय  का  रूप  ले  लिया  है  ,   धर्म  की  ठेकेदारी  भी  रोजगार  है  l  इस  क्षेत्र  में  अच्छे  लोग  भी  हैं   लेकिन  एक  मछली  सारे  तालाब  को  गन्दा  करती  है  l 
   धर्म  का   ऐसा  रूप  युगों  से  चला  आ  रहा  है   l  अब  जनसँख्या  बढ़ने  से  परिस्थितियां  बदल  गई  हैं   l  धर्म  के  नाम  पर  होने  वाले  कार्यों  में  इतनी  भीड़   और  शोर - शराबा  होता  है  कि  अपराधी  को  अपने  कार्यों  को  अंजाम  देने  का  पूरा  मौका  मिल  जाता  है   l    छोटे  बच्चों  का  खो  जाना ,  उनका  अपहरण ,  बच्चियों  और  महिलाओं  से  शर्मनाक  व्यवहार  ऐसी  ही  भीड़  का  फायदा  उठाकर  अपराधी  करता  है  l 
  समाज  को  जागरूक  होना  पड़ेगा    कि  अपनी  छोटी - छोटी  बचतों  को   क्षणिक  मनोरंजन  के  लिए  ऐसे   कर्मकाण्डों  पर  खर्च  न  कर  किसी  सकारात्मक  कार्य  में  लगाये  तो  उसे  गरीबी  और  बेरोजगारी  का  रोना  न  रोना  पड़े   l 

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