Monday, 30 April 2018

संसार में सुख शान्ति के लिए प्रकृति के निर्देशों को मानना होगा

वर्तमान  परिस्थितियों  को  देखकर  ऐसा  लगता  है   कि  मनुष्य  सामूहिक   आत्म हत्या  की  ओर  बढ़  रहा  है  l 
 मनुष्य  अपने  अहंकार  के   कारण   लोगों  को  तो  सताता  ही  है  ,  वह  प्रकृति  को  भी  नहीं  छोड़ता  है   l  मानव  शरीर  में  जो  अंग   शरीर  के  अन्दर  हैं  ,  वे  अन्दर  ही  अच्छे  हैं  यदि  ह्रदय , फेफड़ा   या  कोई  भी  आंतरिक  भाग  शरीर  के  ऊपर  हो  तो  वह  उचित  न  होगा ,  उसकी  चिकित्सा  जरुरी  होगी   l  इसी  प्रकार  धरती  हमारी  माता  है  ,  इसके  भीतर  बहुत   गहराई  जो    पदार्थ  हैं  ,  वैज्ञानिक  और  आध्यात्मिक  कारणों  से  उनका   उस  गहराई  में  रहना  ही  उचित  है  l  लेकिन  आज  विश्व  भर  में  आतंक  और  आशंका  का   वातावरण  है  ,  नये - नये  अणु  स्रोतों  की  खोज  हो  रही   l  अहंकारी  सोचता  है  की  शक्तिशाली  होकर  मृत्यु  पर  विजय  पा  लेंगे  l  उनके  ऐसे   विनाशकारी    प्रयासों  से  ही   पर्यावरण  असंतुलन  है   और  उसके  समाज  पर  अनेक  हानिकारक  प्रभाव  हैं  l 

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