Thursday, 28 December 2017

सुख - शान्ति के लिए जीवन में सामूहिक संवेदनशीलता और सहयोग अनिवार्य है

   पारिवारिक  जीवन  हो  या  सामाजिक  जीवन   जब  तक  लोगों  के  ह्रदय  में  संवेदना  और  परस्पर  सहयोग  का  भाव  नहीं  होगा  तब  तक  सुख - शान्ति  संभव  नहीं  है  l   परिवार  इसीलिए  टूटते  हैं  कि  कहीं   पुरुष  निर्दयी  और  स्वार्थी  है ,  तो  कहीं  नारी  कर्कश  स्वभाव   की    है  l   संवेदना  और  त्याग  का  अभाव  है   l    कहीं  तलाक  दे कर  एक - दूसरे  को  और  बच्चों  को  उत्पीड़ित  करते  हैं  तो  कहीं   साथ  रहकर    निरंतर  क्रोध , लड़ाई - झगड़ा,  उपेक्षा  ,  कलह  आदि   से  पारिवारिक  जीवन  को  जहरीला  बना  देते  हैं  l  परिवार  से  मिलकर  ही  समाज  बना  है   l   हम  सब  एक  माला  के  मोती  हैं  l   इस  धरती  पर  सब  को  जीने  का  हक  है   और  हम  सब ---  मनुष्य ,  पेड़ - पौधे ,  जीव - जंतु  ,  जल , पहाड़ -----  सब  परस्पर  निर्भर  हैं   l   जब  हम  एक - दूसरे  के   महत्व   को  समझेंगे   तभी  सुख - शान्ति  संभव  है   l  

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