Thursday, 11 January 2018

बुराई बड़ी तेजी से फैलती है

    जैसे  पानी  बड़ी  तेजी  से  नीचे  गिरता  है  ,  इसी  तरह  बुरा बनना  बहुत  सरल  है   l  नासमझ  व्यक्ति  तात्कालिक  लाभ  देखता  है   इसलिए  वह  बुरी  आदतों  को  बहुत  जल्दी  अपना  लेता  है  l  दुष्प्रवृत्तियां  संक्रामक  रोग  की  तरह  बड़ी  तेजी  से  फैलती  हैं  l    दंड  का  भय  न  हो  ,   संरक्षण  देने  वाले  अनेक  हों   तब   समाज  में   बड़े - बड़े  अपराध  होते  हैं   और  पतन  इतनी  तेजी  से  होता  है  कि  मनुष्य  ,   पशु  से  भी  बदतर   राक्षस  हो  जाता  है  l   पहले  समय  में  डाकू  अपराधी  समाज  से  बाहर  गिरोह  बनाकर  रहते  थे  l  किसी  परिवार  में  कोई  गलत  रास्ते  पर  चलता  था ,  अपराधी  हो  तो  ऐसे  परिवार  से  मेलजोल  रखना  लोग  अपनी  शान  के  खिलाफ  समझते  थे  l  लेकिन  ये  बातें  अब  दिवास्वप्न  हैं   l  अब  अपराधी  समाज  में  घुलमिल कर  रहते  हैं  ,  उन्हें  सम्मान  भी  मिलता  है ,  मानो  उन्होंने  कोई  किला  जीता  हो  !
      अच्छे  लोग  भी  बहुत  हैं  ,  लेकिन  अंधकार  इतना   सघन  है  कि  उसने  अच्छाई  को  ढक  दिया  है    l 
   सद्भाव से  ,  सद्विचारों  के  प्रचार - प्रसार  से  यह  बुराई  दूर  होगी ,  यह  असंभव  है  l   जब  बीमारी  नस - नस  में  समा  जाये ,  लाइलाज  हो  जाये   तो  उसका  बड़ी  गंभीरता  से  इलाज  करना  पड़ता  है  l 
    समाज  को  जागरूक  होना  होगा  ,  वह  धन - वैभव  को  नहीं  सद्गुणों  को  सम्मान  दे  l   अपने  छोटे - छोटे  स्वार्थ  पूरे  करने  के  लिए   ' गुंडों ' का  '  ' आका '  का  सहारा  न  लें  l  

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