Friday, 12 January 2018

अच्छाई को संगठित होना पड़ेगा

जब  अंधकार  सघन  हो  ,  समाज  पर  दुष्टता  हावी  हो  तब  कोई अकेला  उसका  मुकाबला  नहीं  कर  सकता  l  अच्छाई  को  संगठित  होना  जरुरी  है  l   जब  शराबी ,  चोर - उचक्के ,  जुआरी  अपना  मजबूत  संगठन  बना  लेते  हैं    तो  सद्गुण  संपन्न  व्यक्ति  भी  मजबूती  से  संगठित  हो  सकते  हैं  l  अत्याचार  और  अन्याय  के  विरुद्ध  खड़े  होने  का  साहस  कोई  एक  व्यक्ति  भी  करे   तो  धीरे - धीरे  अनेक  लोग  उसके  साथ  जुड़ते  जाते  हैं  l    लेकिन  जब  समाज  पर  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  होता  है    तो  धार्मिक , सामाजिक  ,  राजनीतिक  सभी  क्षेत्रों  में   लोग  अपनी - अपनी  दुकान  बचाने  में  लगे  रहते  हैं  l  अपने  व्यक्तित्व  को  मारकर ,  अपने  स्वाभिमान  को  मिटाकर    दूसरों  के  इशारों  पर  चलते  हैं  l  यह  स्थिति  बहुत  कष्टप्रद  है  ,  इससे  तनाव  पैदा  होता  है   और  उससे  जुडी  अनेक  बीमारियाँ   l  समय  रहते  जागरूकता  जरुरी  है  l 

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