Monday, 15 January 2018

दुर्गुणों को सीखकर व्यक्ति बहुत जल्दी अपने जीवन में उतार लेता है

नशा ,  जुआ  आदि  अनेक  दुर्गुण  हैं  जिन्हें   व्यक्ति  तुरंत  अपने  व्यवहार  में  ले  आता  है   और  उन  दुर्गुणों पर  बड़े  नियम  से  अमल  करता  है  l     यह  दोष - दुर्गुण    पीढ़ी - दर -पीढ़ी  चलते  हैं  और  मनुष्य  सामाजिक  प्राणी  है  इसलिए  एक  दूसरे  के  संपर्क  में  आने  से  भी  फैलते  हैं  l   माता - पिता  बच्चों  के  सामने  कितने  ही  आदर्श  बने  रहें    लेकिन  सच  छुपता  नहीं  है  l 
  युगों  की  गुलामी  के  बाद  देश  आजाद  हुआ   तो  लोगों  ने   स्वतंत्रता    के  आनंद  को  स्वच्छंदता  में  बदल  लिया  ,  आने  वाली  पीढ़ियों  को  भौतिक  सुविधाएँ   बहुत  दीं  लेकिन  मानवीय  मूल्यों  का  ज्ञान  नहीं  कराया  l  आज  जो  समाज  में  स्थिति  है  वह  इसी  स्वच्छंदता  का  परिणाम  है  l  

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