समाज में अशान्ति की एक बहुत बड़ी वजह है कि लोग स्वयं को किसी सकारात्मक कार्य में व्यस्त नहीं रखते , श्रेष्ठ साहित्य पढने में उनकी रूचि नहीं है । ऐसा वर्ग ही नकारात्मक गतिविधियों में लगा रहता है जिससे तनाव उत्पन्न होता है । इस वर्ग के लोग गली - मोहल्लों में , विभिन्न संस्थाओं में भी होते हैं जो नेताओं की , अधिकारियों की चापलूसी कर स्वयं को बहुत शक्तिशाली समझने लगते हैं । एक ज्ञानवान व्यक्ति , प्रतिष्ठित व्यक्ति कोई बात कहे तो अधिकांश लोग उसकी बात स्वीकार कर लेते हैं लेकिन जब ऐसे लोग जिनमे कोई ज्ञान नहीं है , केवल अहंकार है और चापलूसी से अर्जित शक्ति है , उनकी हुकूमत को जब कोई सहन नहीं करता है तो अशांति उत्पन्न होती है । ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नियंत्रण जरुरी है ।
Wednesday, 5 April 2017
Monday, 3 April 2017
मनुष्य अपने स्वभाव को बदलना नहीं चाहता
आज के समय में व्यक्ति अपने सुख से इतना सुखी नहीं है जितना कि वह दूसरों को दुःखी और परेशान देखकर खुश होता है । इसलिए मनुष्य सम्मिलित रूप से ऐसे प्रयास भी नहीं करता कि समाज में सुख - शान्ति हो । जिसके पास ताकत है , चाहे वह धन की हो , पद की हो या शारीरिक बल हो , इसके मद में व्यक्ति अन्य लोगों को कमजोर बनाये रखने का प्रयास करता रहेगा ताकि लोग उसके पास खुशामद करने आते रहें और अपने चारों ओर जरुरतमंदों की भीड़ देखकर उसके अहंकार को पोषण मिलता रहे ।
जैसे समर्थ व्यक्ति हो या संस्था जरूरतमंद को आर्थिक सहायता के रूप में नगद धन या कोई वस्तु देकर मदद करते हैं । यह राशी कितने दिन चलेगी ? थोड़े समय बाद इसके समाप्त होने पर फिर वह दीन- हीन हो जायेगा । लेकिन यदि उसे उसकी योग्यता के अनुरूप कोई रोजगार दे दिया जाये तो वह इससे प्राप्त आय से स्वयं का जीवन भी बना लेगा और परिवार का भी पालन - पोषण कर लेगा l
जैसे समर्थ व्यक्ति हो या संस्था जरूरतमंद को आर्थिक सहायता के रूप में नगद धन या कोई वस्तु देकर मदद करते हैं । यह राशी कितने दिन चलेगी ? थोड़े समय बाद इसके समाप्त होने पर फिर वह दीन- हीन हो जायेगा । लेकिन यदि उसे उसकी योग्यता के अनुरूप कोई रोजगार दे दिया जाये तो वह इससे प्राप्त आय से स्वयं का जीवन भी बना लेगा और परिवार का भी पालन - पोषण कर लेगा l
Saturday, 1 April 2017
सभी समस्याओं का कारण दुर्बुद्धि है
जब हम बीमारी को अनुभव करते हैं तभी उसका इलाज करते हैं | सर्वप्रथम लोगों को यह स्वीकार करना होगा कि सम्पूर्ण समाज पर ही दुर्बुद्धि का प्रकोप है । इस सत्य को स्वीकार करने के बाद ही सबके सम्मिलित प्रयास से दुर्बुद्धि का अंत हो सकता है ।
आज हमारे देश को स्वतंत्र हुए बहुत वर्ष बीत गए , अब कोई विदेशी आकर यहाँ न तो गौ हत्या करता है , न ही कोई विदेशी यहाँ आकर नारी का चरित्र हनन और पवित्र नदी गंगा को प्रदूषित करने का कार्य करता है । ये तीनो महापाप इसी देश के लोग करते हैं और स्वयं को धार्मिक कहते हैं । ------ यही दुर्बुद्धि है । अपनी संस्कृति , अपनी पहचान को जीवित रखना है , दैवी आपदाओं से बचना है -- तो अब जागने की जरुरत है , कहीं देर न हो जाये ! सबके दृढ़ संकल्प और सम्मिलित प्रयास से ही इन पापों से मुक्ति संभव है ।
आज हमारे देश को स्वतंत्र हुए बहुत वर्ष बीत गए , अब कोई विदेशी आकर यहाँ न तो गौ हत्या करता है , न ही कोई विदेशी यहाँ आकर नारी का चरित्र हनन और पवित्र नदी गंगा को प्रदूषित करने का कार्य करता है । ये तीनो महापाप इसी देश के लोग करते हैं और स्वयं को धार्मिक कहते हैं । ------ यही दुर्बुद्धि है । अपनी संस्कृति , अपनी पहचान को जीवित रखना है , दैवी आपदाओं से बचना है -- तो अब जागने की जरुरत है , कहीं देर न हो जाये ! सबके दृढ़ संकल्प और सम्मिलित प्रयास से ही इन पापों से मुक्ति संभव है ।
Friday, 31 March 2017
सुख - शान्ति से जीने के लिए विवेक की जरुरत है
आज के समय में लोग अपने शरीर को स्वस्थ और सुडौल बनाने के लिए बहुत समय व धन खर्च करते हैं , इन सबसे स्वास्थ्य अच्छा हो भी जाता है लेकिन जब तक मनुष्य का चरित्र , चाल - चलन , उसके विचार अच्छे न होंगे उसका मन भटकता ही रहेगा , शांति नहीं मिलेगी । स्वास्थ्य अच्छा है लेकिन क्रोध बहुत है तो परिवार में झगडे होंगे , अहंकार , लालच , बेईमानी , छल - कपट आदि दुर्गुण हैं तो ऐसा व्यक्ति चाहे शारीरिक द्रष्टि से स्वस्थ हो लेकिन वह स्वयं के लिए और समाज के लिए हानिकारक है । अपनी बुरी आदतों को दूर करना , सद्गुणों को अपनाना बहुत बड़ा तप है । बुराई में रहते हुए व्यक्ति उसी का अभ्यस्त हो जाता है , अच्छाई को देखने से , सुनने से डरता है । इसलिए जरुरी है कि अच्छाई संगठित हो ताकि उसकी चमक देखकर अन्य लोगों को भी सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त हो ।
Wednesday, 29 March 2017
दूषित विचार ही संसार में अशान्ति का कारण हैं
आज समाज में महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध , उन्हें अमानवीय तरीके से उत्पीड़ित करना , हत्या कर देना ---- यह सब पशु - प्रवृति बढ़ती जा रही है । इसका कारण हमेशा दूषित विचारों की संगत में रहना । फिल्मों की अश्लीलता , दूषित साहित्य --- यह सब मनुष्य के मन को विषैला कर देते हैं , जो कुछ व्यक्ति फिल्मों में देखता है , या ऐसे गंदे साहित्य में पढ़ता है , वही विचार उसके मन में चलते रहते हैं । वह कोई भी कार्य करे , इन दूषित विचारों से मुक्त नहीं हो पाता, उसकी बुद्धि , विवेक समाप्त हो जाता है और वह विभिन्न अपराधों में संलग्न हो जाता है । बिना श्रेष्ठ चरित्र के कोई भी संस्कृति जीवित नहीं रह सकती । ऐसे दूषित प्रवृति के लोग अपने परिवार , समाज और राष्ट्र सभी के लिए घातक हैं । विचार परिष्कार के बिना शान्ति संभव नहीं है ।
Sunday, 26 March 2017
संसार में अशांति का कारण वातावरण में नकारात्मकता है
व्यक्ति जो भी अच्छे - बुरे कार्य करता है उसका प्रभाव उस स्थान विशेष के वातावरण पर पड़ता
है । युगों - युगों से शक्तिशाली वर्ग ने अपने से कमजोर को सताया है , असहनीय कष्ट दिया है । इसका कारण विभिन्न देशों में भिन्न - भिन्न होगा , लेकिन आधिक्य उन्ही घटनाओं का रहा जिसमे लोगों को बहुत अधिक शारीरिक और मानसिक कष्ट दिया गया । कहते हैं उन उत्पीड़ित लोगों की आहें उस स्थान विशेष पर वायुमंडल में रहती हैं इसलिए परिवार हो या राष्ट्र ---- चाहें कितनी भी भौतिक सम्पन्नता हो , इस नकारात्मकता के कारण अशान्ति रहती है ।
इससे बचने का एक ही तरीका है कि अब वर्तमान में किसी पर अत्याचार न करे , किसी को कष्ट न दे और जितना संभव हो नि:स्वार्थ भाव से सेवा - परोपकार के कार्य करे ताकि इससे उत्पन्न सकारात्मकता , वातावरण की नकारात्मकता को दूर भगा दे ।
है । युगों - युगों से शक्तिशाली वर्ग ने अपने से कमजोर को सताया है , असहनीय कष्ट दिया है । इसका कारण विभिन्न देशों में भिन्न - भिन्न होगा , लेकिन आधिक्य उन्ही घटनाओं का रहा जिसमे लोगों को बहुत अधिक शारीरिक और मानसिक कष्ट दिया गया । कहते हैं उन उत्पीड़ित लोगों की आहें उस स्थान विशेष पर वायुमंडल में रहती हैं इसलिए परिवार हो या राष्ट्र ---- चाहें कितनी भी भौतिक सम्पन्नता हो , इस नकारात्मकता के कारण अशान्ति रहती है ।
इससे बचने का एक ही तरीका है कि अब वर्तमान में किसी पर अत्याचार न करे , किसी को कष्ट न दे और जितना संभव हो नि:स्वार्थ भाव से सेवा - परोपकार के कार्य करे ताकि इससे उत्पन्न सकारात्मकता , वातावरण की नकारात्मकता को दूर भगा दे ।
Thursday, 16 March 2017
सद्बुद्धि कैसे जाग्रत हो
आज संसार पर दुर्बुद्धि का प्रकोप है प्रत्येक व्यक्ति जाने - अनजाने स्वयं का ही अहित कर रहा है | जब कला , साहित्य , पर्यावरण सभी कुछ प्रदूषित है तो सद्बुद्धि कैसे आये ?
विचारों में परिवर्तन इतना आसान नहीं होता , मनुष्य अपने विचारों के प्रति बड़ा जड़ होता है , स्वयं को बदलना नहीं चाहता | आज के इस युग में जब मनुष्य बिना सोचे - समझे धन के पीछे भाग रहा है , इच्छाओं का अंत नहीं है , ऐसी स्थिति में सद्बुद्धि के लिए एक छोटा - सा प्रयास जरुरी है , वह है ----- निष्काम कर्म | नि:स्वार्थ भाव से व्यक्ति सेवा - परोपकार का कोई भी कार्य नियमित करे तो स्वयं के जीवन में , व्यक्तित्व में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन होगा कि स्वयं को आश्चर्य होगा | अपने धार्मिक कर्मकांड के साथ यदि अज्ञात शक्ति को याद करते हुए गायत्री मन्त्र का जप कर लिया जाये तो इस मन्त्र की शक्ति को आप स्वयं अनुभव करेंगे |
विचारों में परिवर्तन इतना आसान नहीं होता , मनुष्य अपने विचारों के प्रति बड़ा जड़ होता है , स्वयं को बदलना नहीं चाहता | आज के इस युग में जब मनुष्य बिना सोचे - समझे धन के पीछे भाग रहा है , इच्छाओं का अंत नहीं है , ऐसी स्थिति में सद्बुद्धि के लिए एक छोटा - सा प्रयास जरुरी है , वह है ----- निष्काम कर्म | नि:स्वार्थ भाव से व्यक्ति सेवा - परोपकार का कोई भी कार्य नियमित करे तो स्वयं के जीवन में , व्यक्तित्व में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन होगा कि स्वयं को आश्चर्य होगा | अपने धार्मिक कर्मकांड के साथ यदि अज्ञात शक्ति को याद करते हुए गायत्री मन्त्र का जप कर लिया जाये तो इस मन्त्र की शक्ति को आप स्वयं अनुभव करेंगे |
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