Friday, 7 April 2017

समाज में शान्ति के लिए मानसिक स्थिरता अनिवार्य है

  मनुष्यों  से  मिलकर  समाज  बना  है   |   यदि  लोगों  में  तुनुक मिजाजी ,  असहिष्णुता ,  बात  का  बतंगढ़  बनाना  जैसे  दुर्गुण  हैं  तो  समाज  में  शान्ति  कैसे  हो     सकती    है   |  कई  बार  समाज  में  भयंकर  उत्पात  हो  जाते  हैं  ,  उनके  मूल  में  देखा  जाये  तो  कारण  बहुत  छोटे  होते  हैं  ,  लेकिन  मनुष्य  का  अहंकार ,  उसकी  असहिष्णुता  आदि  ऐसी  दुष्प्रवृत्तियों  के  कारण   ही   समाज  में  लड़ाई  - झगड़े  आदि  तनाव  उत्पन्न  होते  हैं   |
  यदि  बाल्यावस्था  से  ही      लोगों  को    नैतिक  शिक्षा ,  जीवन  जीने  की  कला  जैसे  विषयों  की  अनिवार्य
  शिक्षा  दी  जाये    ,  धर्म  ग्रंथों  जैसे   गीता  का  शिक्ष्ण     अनिवार्य  हो   | 

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