Tuesday, 5 June 2018

जो जागते हुए सोने का अभिनय करे उन्हें जगाना बहुत मुश्किल है

 आज  समाज  स्वार्थ  की  नींद  में  सोया  हुआ  है  l   जो  प्रौढ़  और  बुजुर्ग  हैं  उन्हें  लगता  है   कि  जीवन  कब  हाथ  से  फिसल  जाये  जितना  सुख  भोग  सको  भोग  लो   l  काम , क्रोध , लोभ  -- आखिरी  सांस  तक  इसी  के  पीछे   दौड़ते  हैं  l  निष्काम  कर्म  और  त्याग  का  जीवन  जीने  वाले  तो  बहुत  कम  लोग  हैं  l  इसी  तरह  युवा  वर्ग  है   जो  नशा , मौज - मस्ती  को  ही  जवानी  समझता  है  l 
  युवा  वर्ग  के  सामने   समस्या  चाहे बेरोजगारी  की  हो  ,  पर्यावरण  प्रदूषण  की  हो  या   अपने  अस्तित्व  को  बनाये  रखने  की  हो   उसके  समाधान  के  लिए  जागरूकता  और  विवेक  की  जरुरत  है    l 

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