Wednesday, 20 June 2018

अहंकारी व्यक्ति की बुद्धि , दुर्बुद्धि में बदल जाती है

   महाभारत  में   भगवन  श्रीकृष्ण  ने  अर्जुन  के  जीवन  की  बागडोर  अपने  हाथ  में  ले  ली   क्योंकि  अर्जुन  में  नम्रता  थी  अहंकार  नहीं  था   l  कहते  हैं  ईश्वर  जिस  पर  कृपा  करते   हैं  उसे  सद्बुद्धि  देते  हैं  और  जो  अहंकारी  है ,  अत्याचारी  है   उसे  दुर्बुद्धि  देते  हैं   l  फिर  ईश्वर  को  हथियार  नहीं  उठाना  पड़ता  ,  अहंकारी  की  दुर्बुद्धि  ही  उसका  अंत  कर  देती  है    l 
     अहंकारी  व्यक्ति  को  ये  बात  समझ  में  नहीं  आती  कि  उसके  अत्याचार  से   तंग  आकर   लोगों  के  ह्रदय  में  उसके  लिए  कितनी  नफरत  भर  गई  होगी  l  एक  घटना  है  ----  एक  परिवार  में  पति - पत्नी  और  एक  बच्चा  था  l   एक  दुष्ट  व्यक्ति  ने  उन  पर  बहुत  अत्याचार  किये  ,  उनकी  सम्पति  आदि  सब  हड़प  ली  ,  फिर  भी  हर  तरह  से  परेशान    करता  था  l  गरीबी ,  अत्याचार   इन  सबसे  तंग  आकर  पत्नी  दूसरे  बच्चे  को  जन्म  देकर  चल    बसी  l   लेकिन  अत्याचार  का  अंत  नहीं  हुआ  l  पिता  के  साथ  यातनाएं  सहते - सहते  वह  बच्चा   चार  वर्ष  का  हो  गया  l   एक  दिन  अपने  पिता  के  साथ  अपने  छोटे  से  नाममात्र  के  खेत  पर  जा  रहा  था  कि  उस  दुष्ट  व्यक्ति  ने    आकर  उसके  पिता  को  बहुत  मारा - पीटा,  अभद्र  भाषा  बोली   l  अचानक  उस  बच्चे  ने  अपने  छोटे ,  कमजोर  हाथ  से  एक  छोटा  सा  पत्थर  उठाया  और  उस  छह  फुट  लम्बे  आदमी  को  दे  मारा  ,  जो  उसकी  आँख  में  लगा  l  वह  सन्न  रह  गया  l  उसने  कसकर  बच्चे  का  हाथ  पकड़ा   तो  बच्चे  ने  उसके  हाथ  में  काट  लिया  l  अब  बच्चे  की  खैर  नहीं   थी  l  उसी  समय  एक  साधु  आ  गया  ,  उसने  बीच - बचाव  कर  के  बच्चे  को  बचा  लिया  l  और  उस  दुष्ट  आदमी  को  कहा   कि  बच्चे  ने  जो  किया  ,  वह  तुम्हारे  ही  अत्याचार  की  कहानी  है  l  ----
हमें  ईश्वर  से  डरना  चाहिए  ,  अति  का  अहंकार  प्रकृति  भी  सहन  नहीं  करती   l  

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