Tuesday, 12 June 2018

व्यक्ति अपनी असलियत छुपाता है इसलिए तनाव में जीता है

 कहते  हैं    जिस  व्यक्ति   को   अहंकार  नहीं  है  उसे   दुःखी  करना  असंभव  है    और  जो  अहंकारी  है  उसे  सुखी  करना  असंभव  है  l  
     अहंकार  नहीं  है  - ऐसा  व्यक्ति    हर  हाल  में  खुश  व  तनाव रहित  रहता  है   l  कोई  कुछ  भी  कहे  कहता  रहे  ,  वह  अपनी  दुनिया  में    मस्त  रहता  है   क्योंकि  वह  जानता  है  कि  उसकी  सच्चाई    ईश्वर    जानते  हैं   l
  लेकिन  जो  अहंकारी  है  ,  वह  अपने  इस  दुर्गुण  से  अपने  ही  जीवन  को  नर्क  बना  लेता  है   l  अपने  अहंकार  की  तुष्टि  के  लिए  वह  अपने  ऊपर  शराफत  और  श्रेष्ठ  चरित्र  का  चोला  डाल  लेता  है   l 
  अच्छाई  में  एक  अनोखा  आकर्षण  होता  है   इसलिए  बुरे  से  बुरा  व्यक्ति    भी  समाज  में  यश , प्रसिद्धि  , सम्मान , बड़ा  आदमी   कहलाने  के  लिए    अपने  ऊपर  अच्छाई  का  आवरण  डाल  लेता  है  l   बस  !  यहीं  से  उसके  जीवन  का  कष्ट  शुरू  हो  जाता  है   l   देखने  में  लोगों  को  लगता  है -- देखो  कितना  सुखी  है , कितने  ठाठ - बाट  हैं  ,  कितना  सम्मान  है ,  लेकिन   इसके  पीछे   की  सच्चाई   ऐसा  अहंकारी  स्वयं   जानता    है   कि  अपने  इस  आवरण  को  कटने - फटने  से  बचाने  के  लिए  उसे  कितनो  को  खुश  करना  पड़ता , कितने  लोगों  की  धौंस  सहनी  पड़ती  है ,  न  जाने  कितनों  की  गुलामी  करनी  पड़ती  है ,  अपने  को  सम्मानित कराने  के  लिए  कितनों  को  खरीदना  पड़ता  है  l  यह  सब  बातें  उसके  जीवन  को  तनाव  से  भर  देती  हैं  ,  उसकी  नींद ,  उसका  सुख - चैन  सब  छीन  लेती  हैं  l 
  जो  सीधी  सरल  जिन्दगी  जीते  हैं ,   जिसने  अपनी  कामनाओं - वासनाओं  पर  नियंत्रण  रखा  है  , वे  तनाव रहित  रहते  हैं , जब  भी  वक्त  मिल  जाये  चैन  की  नींद  सो  लेते  हैं  l
  एक  बार  वायसराय  ने  गांधीजी  को  मिलने  को  बुलाया   l  गांधीजी  मिलने  गए  l  वायसराय  ने  कहलवाया   कि   अभी   पंद्रह  मिनट  की  देर  है , आप  बैठें  l  गांधीजी  ने  कहा  कि  मैं  रात  भर  का  जगा  हूँ  ,  पंद्रह  मिनट  सो  लूँगा  तो  सिर  हलका  हो  जायेगा  l  झट  से  उन्होंने  अपनी  चादर  सोफे  पर  लम्बी  की  और  वहीँ  सो  गए   l  और  पंद्रह  मिनट  बाद  जब  वायसराय  आये  तो  वे  उठ   बैठे   l   उन्होंने  कहा -- क्या  बात  है  ! इतनी  गहरी  नींद  आती  है   !  
  यह  निर्णय   प्रत्येक  व्यक्ति   को  स्वयं  लेना  है   की  उसे    दिखावे  का  ,  डबल  फेस  का  तनावपूर्ण  जीवन  जीना  है   या   सीधा - सरल ,  खुली  किताब  सा  जीवन  शांतिपूर्ण  ढंग  से  जीना  है  l 

No comments:

Post a Comment