Thursday, 14 June 2018

वर्तमान में जीने के साथ भविष्य के लिए सचेत रहना बहुत जरुरी है

    अनेक  विद्वान  जो  बात  कहते  हैं    उसका   प्रत्येक  व्यक्ति  अपने  संस्कार  ,  अपनी  इच्छाओं , आकांक्षाओं  के  अनुसार    अर्थ  निकलता  है  l  जैसे  यह  कहा  जाता  है  कि  वर्तमान   ही  हमारे  सामने  है ,  उसका  उपयोग  करो  l  इसे  अपना  आदर्श  वाक्य  मानकर  अधिकांश  लोग  वर्तमान  में  सारे  सुख - वैभव ,  मौज - मस्ती  में  समय  बिताते  हैं ,  ऐसे  लोगों  का  सोचना  है  कि  कल  किसने  देखा  आज  मौज  कर  लो  l 
    ऐसी  सोच  से  जीवन  परेशानियों  से  घिर  जाता  है  l
  जीवन  में  संतुलन  जरुरी  है  l  वर्तमान   में   सुख - सुविधाएँ   आदि  की  व्यवस्था  के  साथ  भविष्य  के  लिए  पूंजी  संचित  करें ,  जो  कठिन  वक्त  में  हमारे  काम  आये  l
   लेकिन  यह  पूंजी  केवल  धन - सम्पति  ही  न  हो ,  हम  सत्कर्मों  की  पूंजी  भी  जोड़ें    क्योंकि  सत्कर्मों  में  वो  ताकत  है  जिसके  सहारे  हम  बड़ी से बड़ी  मुसीबतों  से  भी  बचकर  सुरक्षित  निकल  आते  हैं  l 

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