Monday, 11 June 2018

बच्चे और युवा उपेक्षित हों तो भविष्य अंधकारमय होता है

     आज  संसार  पर  दुर्बुद्धि  का  प्रकोप  है  ,  परिवार हो ,  संस्था  हो ,  समाज  हो  या  विभिन्न  राष्ट्र  हों  ,  जिसमे  थोड़ी  भी  ताकत  है ,  वह  जी - जान  से  इस  प्रयास  में  है  कि  कोई    दूसरा    आगे  न  बढ़  पाए  l  इसके  लिए  नैतिकता  को  दरकिनार  कर  के  सब  प्रयास  किये  जाते  हैं  l 
  अब  आज  का  समय  वीरता  से  आमने - सामने  लड़ने  का  नहीं    रहा  l  अब  कायरता  बढ़  गई  है   l  लोग  इस  तरह   के  हथकंडे  अपनाते  हैं   कि  दूसरे  का  अहित  हो  जाये  और   कानून  तो  बहुत  दूर  है ,  कोई  दोष  भी  न  दे  सके  ,  आज  गिरावट  की  कोई  सीमा  नहीं  रह  गई  है  जैसे -- कोई   का  पारिवारिक  जीवन  सुखी  है ,  तो  ईर्ष्यालु  लोग  ऐसा  हर  संभव  प्रयास  करेंगे   कि  रिश्ते  में  दरार  आ  जाये ,  कोई  सुखी  कैसे  है  ?   इसी  तरह   किसी  परिवार  में  बच्चे - युवा   भविष्य  के  प्रति  जागरूक  हैं , जिम्मेदार  हैं  तो  ईर्ष्यालु  लोग   अपनी  तरक्की  का  प्रयास  नहीं  करेंगे ,  उनका प्रयास  होगा  कि  कैसे  उन  युवाओं  का  अहित  करें ,  उनकी  संगत  बिगाड़  दें ,  नशा  आदि  बुरी  आदतें  लग  जाएँ ,  आलसी  बन  जाएँ ,  हर  तरीके  से  वे  खुशहाली  मिटाने  का  प्रयास  करते  हैं ,  ताकि  तरक्की  न  कर  पायें  l
      यही  बात  राष्ट्र  के  सम्बन्ध  में    लागू   होती  है  l    बच्चे  असुरक्षित  रहें ,  युवाओं  के  सामने  तरह - तरह  के  नशे , विज्ञापन , फ़िल्में , टीवी , और  मोबाइल  के  माध्यम  से  अश्लीलता  परोस  कर   उनका  चरित्र  हनन  कर  दो  और  बिना  मेहनत  का  पैसा  देकर  उन्हें  आलसी  बना  दो  l  ऐसा  होने  पर  परिवार  हो  या  राष्ट्र  विकास  नहीं  होता  और  न  ही  संस्कृति  सुरक्षित  होती  है   l
 अब  बचे  केवल  प्रौढ़  और  वृद्ध  --- अमर  होकर  कोई  नहीं  आया  ,  लेकिन  सोच  यह  है  कि  कोई  सुख  छूट  न  जाये ,  पैसा , भोग - विलासिता  हाथ  से  न  निकल  जाये   l   नई  पीढ़ी को   अच्छी  शिक्षा ,  अच्छे  संस्कार  न   देकर  ,  ऐसे ही  चले  जायेंगे   l  इससे  न  तो  संसार  में  यश  मिलेगा   और  न  ही  ईश्वर  माफ  करेगा   l
 नई  पीढ़ी  का  निर्माण  करने  वाले  भी  देश  में  हैं ,  लेकिन     पतन  का  तूफान  बहुत  घना  है ,  बचाने  वाले  कम  हैं  l   अब  नई  पीढ़ी  को  स्वयं  जागरूक  होने  की  जरुरत  है   l  संसार  में  अच्छाई- बुराई  दोनों  हैं ,  अच्छाई  को  चुने ,  परिश्रमी  बने   l  

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