Wednesday, 25 February 2015

मन की शांति के लिए अपनी ऊर्जा का पूर्ण विदोहन जरुरी है

आज  के  समय  में  व्यक्ति  अपने   शारीरिक   स्वास्थ्य  के  लिए  बहुत  जागरुक  हो  गया  है  लेकिन    मन   को   स्वस्थ  रखने  का  कोई  प्रयास  नहीं  करता  ।  स्वस्थ  रहन  के  लिए  व्यक्ति  योग,  आसन,  प्राणायाम,  करता  है,  नियमित  रूप  से   जिम   जाते  हैं  इससे  शरीर  में  बहुत  ऊर्जा  पैदा  हो   जाती   है  ।   अब एक  सामान्य  व्यक्ति  नियमित  रूप  से  इतना  सेवा-परोपकार  का  कार्य,  निष्काम  कर्म  नही  कर  पाता     कि  उसकी  इस  ऊर्जा  का  पूर्ण  प्रयोग  हों  जाये  । एक  सामान्य  व्यक्ति  के  लिए  तो  कर्तव्य  पालन  ही  तप    है, विवेक  और  ईमानदारी  के  साथ  कर्तव्यपालन   करके  ही  अपनी  ऊर्जा  का  समुचित  विदोहन  कर  सकता  है  ।  आज  लोगों  के    मन  में  इतनी  अशांति   है   इसका  प्रमुख   कारण   यही   है   कि   व्यक्ति   कर्तव्य   पालन   का   तप   पूर्ण   रूप   से   नहीं   कर   रहा  है  ।
पारिवारिक   जीवन   में----- धन   कमाना     महत्वपूर्ण   है   इसलिए   बच्चों   को   नौकरों   के   पास   या   संस्थाओं   में   छोड़कर   पारिवारिक   दायित्व   से   मुक्ति   पा   ली  ।
विभिन्न   कार्यालयों   मे   भी   काम   जल्दी    कर   सकते   है  लेकिन   नहीं   करते ,  फाइलों   का   ढेर जमा   रहते   है   । कम्प्यूटर   आदि   विभिन्न   साधन   होते   हुए   भी   जो   काम   तीन   घंटे  में   हो   सकता   है   उसे  तीन   महीने   में   करना   ।
हर   क्रिया   की  प्रतिक्रिया   होती  है   । कार्य   को   धीमी   गति   से   करने    का   माहौल   बन   गया   है  ।   जितना   प्राप्त   किया   उतना   चुकाया   नहीं ,  कर्तव्य पालन   में   ईमानदारी   और   समर्पण भाव   नहीं   है   इस   कारण   ऊर्जा   का समुचित   विदोहन   नहीं   हो   पाता ,  प्रकृति   नाराज   हो  जाती   है   और   यह   अतिरिक्त   ऊर्जा   क्रोध ,  चिड़ चिड़ा पन ,  तनाव  आदि गलत   दिशा   में   निकलती   है  । 

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