Saturday, 14 July 2018

अत्याचारी और अन्यायी का कोई धर्म नहीं होता

 महिलाओं  पर  अत्याचार  के  सम्बन्ध  में   सभी  पुरुषों  की  मानसिकता एक  सी  होती  है  ,  चाहे  वे  किसी  भी  धर्म  के  हों ,  किसी  भी   जाति  अथवा  समाज  के  हों  l    अपने  अहंकार की  पूर्ति  और  अपने  को  नारी  से  श्रेष्ठ    दिखाने  की  भावना  ,  अपनी  हुकूमत  चलाने  की  आदत  ऐसे  अनेक  कारण  हैं    जिससे  वे  नारी  को  उत्पीड़ित  करते  हैं   l  
  घरेलू  हिंसा  एक  अलग  समस्या  है  l    शिक्षा  का  प्रचार - प्रसार  बढ़  रहा  है  ,  हम  आधुनिक  युग  में  जी  रहे  हैं   लेकिन  पुरुषों  की  मानसिकता  नहीं  बदली  ,  इस  कारण  सामाजिक  उत्पीड़न  भी   बहुत  है   l  पुरुषों  में     नारी  के  प्रति  मित्रता  का  भाव  नहीं  रहता  ,   उसकी  कमजोरी  का   फायदा  उठाने  का  भाव  प्रबल  होता  है   l  घर  और  बाहर  दोहरी  जिम्मेदारी  की  वजह  से   महिलाएं  इतनी  सजग  नहीं  हो  पातीं  इस  कारण  संस्थाओं  में ,  समाज  में   उत्पीड़न  सहना  पड़ता  है   l  
   महिलाएं  भी  आपसी  ईर्ष्या - द्वेष  ,  महत्वाकांक्षा  की  वजह  से ,  दूसरे  को  धक्का  मार  कर  स्वयं  आगे  बढ़ने  की   इच्छा   आदि  कारणों  से      विभिन्न  षड्यंत्रों  में  पुरुषों  का  साथ  देती  हैं  l  
   इन  सबसे  परिवार  और  समाज  में   तनाव  पैदा  होते  हैं   l  

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