Monday, 9 July 2018

कठोर दंड से ही अपराध पर नियंत्रण संभव है

  जब  कभी  समाज  में  स्थिति  इतनी  विकट  हो   जाती  है  कि  व्यक्ति  अपने  को  राक्षस  कहने - कहलाने  में  गर्व  अनुभव  करने  लगे   तब  उसका  अंत  करना  ही  उचित  होता  है   l  ----  महर्षि  पुलस्त्य  का  पौत्र  और  परमज्ञानी , तेजस्वी  महर्षि  विश्रवा  का  पुत्र  रावण  अपने  को  ऋषि पुत्र   कहने  के  बजाय
    ' राक्षसराज '  कहता  था   l  वेद  और  शास्त्रों  का   ज्ञाता ,  महान  विद्वान्  होते  हुए  भी   मर्यादा  भुला  बैठा   l  छल  से  उसने  सीताजी  का  अपहरण  किया  l  तब  भगवन  राम  ने   न  केवल  रावण  का  वध  किया ,  बल्कि  पापी  और  अत्याचारी  का  साथ  देने  वाले  उसके  सभी   बन्धु - बांधवों  का  वध  कर  दिया   ताकि  समाज  को  कलंकित  करने  वाली  ऐसी  घटनाएँ  दुबारा  न  हों  l
  इसी  तरह  महाभारत  में  प्रसंग  है --- जब  पांडव  अज्ञातवास  में  राजा  विराट  के  महल  में  वेश  बदल कर  कार्य  करते  थे   l  महारानी  द्रोपदी    सैरंध्री   बनकर   रानी  की  सेवा  करती  थीं  l  तब  रानी  के  भाई
 ' कीचक '   की  कुद्रष्टि  द्रोपदी  पर  थी   l  जब  बात  असहनीय  हो  गई  तो  एक  दिन  अवसर  पाकर   सैरंध्री  ( महारानी  द्रोपदी )  ने   भीम  से  उसकी  शिकायत  की  l  भीम  को  बहुत  क्रोध  आया ,  उस  दिन  वे  अज्ञातवास  में  थे  इसलिए  सामने  चुनौती  देकर  युद्ध  नहीं  कर  सकते  थे  ,  उन्होंने  योजना  बनाई,  उसके  अनुसार  सैरंध्री  ने   कीचक  से  कहा --- ठीक  है  तुम  रात  को  अँधेरे  में  आना , शर्त  यह  है  कि  रोशनी  बिलकुल  न  हो  l  कीचक  तो   कामांध  था ,  चल  दिया l   वहां   सेज  पर  द्रोपदी  की  बजाय  भीम  बैठ  गए   l   कीचक  बहुत  बलवान  था  l  भीम  और  कीचक  में   मल्ल युद्ध  हुआ  l   भीम  ने  कीचक  को  मौत  के  घाट  उतार  दिया  l
दु:शासन  ने  चीर हरण  किया ,  दुर्योधन  ने  उस  वक्त  अपशब्द  बोले ,   तो  महाभारत  हुआ   समूचे  कौरव  वंश  का  अंत  हो  गया   l   इतिहास  ऐसे  उदाहरण  से  भरा  पड़ा  है  कि  जिसने  भी  नारी  के  सम्मान  को  चुनौती  दी ,  उसे  अपमानित  किया  ,  उसका  अंत   किया  गया   l 
  इसी  तरह  संस्कृति  की  रक्षा  संभव  हो  सकी  है   l    आज  के  समय  में  जब  अपराधी   समाज  में  मिलकर  रौब  से  रहते  हैं   तब  विचारशीलों   को   जागरूक  होने  की   अनिवार्यता  है  l  

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