Sunday, 1 July 2018

संवेदनहीन समाज में समस्याएं बढ़ती जाती हैं

  आज  के  समय  में     मुसीबत ,  कठिनाइयाँ  और  दुःख  में  डूबे  इनसान  के  प्रति  संवेदना  प्रकट  करना  भी  जीवन  रूपी नाटक  का  एक  हिस्सा  बन  गया  है   l  सच्ची  सहानुभूति  और   नि:स्वार्थ  सहयोग  करने  वाले    व्यक्ति  बहुत  कम  या  न  के  बराबर  हैं   l  यदि  किसी  के  ऊपर  मुसीबत  का  पहाड़  टूट  पड़ा   और  समस्या  को  सार्वजनिक  करने  से   किसी  की  गरिमा  को , सम्मान  को  ठेस  पहुँचती  है   तो  सहानुभूति  के  नाम  पर  मुंह  बंद  रखने  की  धमकी  देने  ज्यादा  लोग  आ  जाते  हैं   l
  आज  का  संसार  गणित  से  चलता  l   कुछ   लोग  आपस  में  बहुत  प्रेम  से  बात  करते  हैं ,  एक  दूसरे  का  सहयोग  कर  रहे  हैं   तो  इसका  अर्थ   यह  नहीं  कि  वे  एक  दूसरे  के  प्रति  सच्चे  और  बफादार  हैं  ,  उनका  परस्पर  स्वार्थ  सिद्ध  हो  रहा  है ,  इसलिए  वे  एक  हैं  l
 आज  का  समय  बहुत  विवेक  और  समझदारी  से  चलने  का  है  l  यदि हमारे  जीवन  का  पथ  सही  है   तो  अपनी  समस्याओं  से  कैसे  निपटें  ?  यह  ज्ञान  हमें  अपने   ही  भीतर  से , अपने  अंतर  से  प्राप्त  हो  जाता  है  l  

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