Sunday, 29 July 2018

मनोबल की कमी से अत्याचार और अन्याय बढ़ता है

    यदि  कुछ  लोगों  के  विचार  व  द्रष्टिकोण  में  परिवर्तन  हो  जाये  , वे  अनीति  , अत्याचार  से  घ्रणा  करें  , उसे  मानवता  के   लिए  कलंक  माने   तो  भी  उससे  समस्या  का  हल  नहीं  होता  l  समाज  में  सुख - शांति   और  अमानवीय  तथा  जघन्य  अपराधों  की  रोकथाम  तभी  होगी   जब  सम्पूर्ण  जन - समूह ,  सारी  प्रकृति  अत्याचार  और  अनीति  को  त्याज्य  समझे   और   अत्याचारी , अन्यायी  का  सहयोगी बनने  की  अपेक्षा    कष्ट  और   अकेलापन  सहने  को  तैयार  रहे  l 
  अत्याचारी  हमेशा  बड़े  समूह  में  मजबूती  से  बंधे  होते  हैं  ,  इसलिए  जब  कोई  उनका  विरोध  करता  है ,  उनके  साथ  सहयोग  नहीं  करता  है   तब  वे  ओछे  हथकंडे  अपनाकर  उस  पर  हर  तरीके  से  आक्रमण  कर  उसके  मनोबल  को    गिराना    चाहते  हैं   l  कमजोर  मनोबल  के  व्यक्ति   भय  के   कारण,  लोभ - लालच  के  कारण  या  स्वयं  अपनी  कमजोरियों  के  कारण अत्याचारी  का  विरोध  नहीं  करते    बल्कि  उनको  छिपे  तौर  से  सहयोग  करते  हैं   इससे  अत्याचारियों  के  हौसले  और  बुलंद  हो  जाते  हैं   l 
 अच्छे  व  संवेदनशील  लोगों  को  भी  मजबूती  से  संगठित  होना  पड़ेगा   l    भले  ही  हम   अन्य  व्यक्तियों  की  भावनाओं  को  स्वीकार  करने  को  तैयार  न  हों  ,  तो  भी  हमें   अन्य   व्यक्तियों    के  द्रष्टिकोण  को  समझने  और   तथ्यों  को  दूसरे  व्यक्ति   के  द्रष्टिकोण  से   देखने     के  श्रम  से  बचना  नहीं  चाहिए   l   इस  धरती  पर  जीने  का  और  पनपने  का  हक  सबको  है   l  एक - दूसरे  के  सहयोग  और  सहायता  से  ही  संसार  में  सुख - शांति  संभव  है   l   

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